erere | Source: erereपटना। बिहार में घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए Tata Power ने एक नई योजना शुरू की है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि रूफटॉप सोलर लगवाने के लिए उपभोक्ता को पूरी रकम एक साथ जमा करने की जरूरत नहीं होगी। अगर किसी उपभोक्ता की जेब में फिलहाल सिर्फ 999 रुपये हैं, तब भी वह रूफटॉप सोलर लगवा सकता है। कंपनी ने बिहार में इस योजना को ‘घर घर सोलर’ नाम दिया है। इसके तहत अगले तीन वर्षों में बिहार के 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

999 रुपये देकर शुरू होगा सोलर का सफर, बाकी रकम ईएमआई में

Tata Power ने गुरुवार को पटना के एक होटल में बिहार के लिए ‘घर घर सोलर’ योजना की शुरुआत की। इस अवसर पर Tata Power के सीईओ डॉ. प्रवीर सिन्हा ने बताया कि कंपनी अगले तीन वर्षों के भीतर बिहार के 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। योजना के तहत घरेलू उपभोक्ता केवल 999 रुपये के डाउन पेमेंट के साथ अपने घर पर रूफटॉप सोलर लगवा सकेंगे। इसके बाद शेष राशि के लिए 100 प्रतिशत फाइनेंसिंग के तहत 60 महीनों की आसान ईएमआई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य उन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर को आसान बनाना है, जो एकमुश्त बड़ी रकम खर्च नहीं कर सकते। यानी सोलर सिस्टम की पूरी लागत एक साथ चुकाने के बजाय उपभोक्ता निर्धारित अवधि तक मासिक किस्त के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

1 किलोवाट सोलर के लिए हर महीने 932 रुपये की किस्त

योजना के तहत उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार 1 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट क्षमता तक का सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। 1 किलोवाट के रूफटॉप सोलर के लिए सब्सिडी के बाद 932 रुपये प्रतिमाह की ईएमआई निर्धारित की गई है। यह किस्त 60 महीने यानी पांच साल तक देनी होगी। इसके साथ शुरुआती डाउन पेमेंट 999 रुपये रखा गया है।

इस तरह कम बजट वाले परिवारों के लिए भी घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। हालांकि, वास्तविक आवश्यकता और उपभोक्ता के घर की बिजली खपत के अनुसार सोलर सिस्टम की क्षमता का चयन करना महत्वपूर्ण होगा।

3 किलोवाट सोलर लगवाने पर 2,907 रुपये मासिक ईएमआई

जिन परिवारों की बिजली खपत अधिक है, उनके लिए अधिक क्षमता वाला रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया जा सकता है। 3 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल के लिए योजना के तहत 2,907 रुपये प्रतिमाह की ईएमआई बताई गई है। कार्यक्रम के दौरान बिहार के ऊर्जा सचिव अजय यादव, दक्षिण बिहार पावर कंपनी के एमडी सौरभ जोरवार सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

Tata Power इससे पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस तरह की योजना शुरू कर चुकी है। बिहार में योजना का विस्तार बड़े स्तर पर करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार की सब्सिडी से सोलर लगाने की लागत हो सकती है कम

रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी दी जा रही है। दी गई जानकारी के अनुसार, 1 किलोवाट के सोलर सिस्टम की अनुमानित लागत करीब 60 हजार से 75 हजार रुपये के बीच हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से 1 किलोवाट पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके अतिरिक्त बिहार सरकार की ओर से भी 10 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।

इस हिसाब से सामान्य उपभोक्ता के लिए सब्सिडी के बाद अपनी जेब से करीब 20 हजार से 35 हजार रुपये तक खर्च करने की स्थिति बन सकती है। सोलर सिस्टम की क्षमता बढ़ने के साथ कुल लागत भी बढ़ती है। वहीं, Tata Power की ‘घर घर सोलर’ योजना में 999 रुपये के डाउन पेमेंट और वित्तीय सुविधा के माध्यम से भुगतान को आसान बनाने का विकल्प दिया गया है।

घर की बिजली खपत देखकर तय करें कितने किलोवाट का सोलर चाहिए

रूफटॉप सोलर लगवाने से पहले घर में बिजली की कुल खपत को समझना जरूरी है। 1 किलोवाट का रूफटॉप सोलर सामान्य तौर पर 2 से 3 पंखे, 4 से 5 एलईडी बल्ब, एक टीवी और मोबाइल या लैपटॉप चार्जर जैसी जरूरतों के लिए उपयुक्त हो सकता है।

अगर किसी घर में पंखों और बल्बों की संख्या अधिक है तथा छोटा पानी का पंप और कूलर भी चलता है, तो 2 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है। यानी केवल कम कीमत देखकर क्षमता का चुनाव करने के बजाय घर की वास्तविक बिजली खपत को ध्यान में रखना जरूरी है।

फ्रिज और एसी वाले परिवारों के लिए 3 किलोवाट सिस्टम

जिन घरों में फ्रिज, मिक्सर, पानी की मोटर और 1 टन तक का इन्वर्टर एसी जैसे उपकरण इस्तेमाल होते हैं, उनके लिए कम से कम 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम उपयुक्त बताया गया है। मध्यमवर्गीय परिवारों की जरूरतों को देखते हुए 3 किलोवाट का सिस्टम एक विकल्प हो सकता है।

3 किलोवाट के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर अधिकतम 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 55 हजार से 80 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। यह खर्च ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम के लिए बताया गया है। ऑन-ग्रिड सिस्टम सीधे सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और इससे बिजली की खपत तथा बिजली बिल को कम करने में मदद मिलती है।

बैटरी वाला सोलर सिस्टम लगाने पर खर्च और बढ़ सकता है

ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम के मुकाबले बैटरी वाला सोलर सिस्टम अलग व्यवस्था पर काम करता है। बैटरी आधारित सिस्टम में बिजली को संग्रहित करने की सुविधा होती है और इसे ग्रिड से जोड़ने की जरूरत खत्म हो सकती है। हालांकि, बैटरी शामिल होने के कारण ऐसे सिस्टम की लागत बढ़ सकती है।

इसलिए रूफटॉप सोलर लगवाने से पहले यह तय करना जरूरी है कि घर की जरूरत के लिए ऑन-ग्रिड सिस्टम पर्याप्त है या बैटरी आधारित व्यवस्था की आवश्यकता है। सिस्टम का चुनाव बिजली की खपत और उपलब्ध विकल्पों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

गरीब परिवारों के लिए मुफ्त सोलर की भी व्यवस्था

बिहार में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए सरकार की ओर से मुफ्त सोलर सिस्टम लगाने की व्यवस्था भी बताई गई है। ऐसे परिवारों के घरों की छत पर 1.1 केवीए क्षमता का सोलर सिस्टम पूरी तरह मुफ्त लगाया जा रहा है और इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है।

अन्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये तथा बिहार सरकार की ओर से अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सब्सिडी दिए जाने की जानकारी दी गई है। इससे पात्र उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर लगाने की शुरुआती आर्थिक बाधा कम हो सकती है।

बिहार में सोलर ऊर्जा को घर-घर पहुंचाने की बड़ी पहल

Tata Power की ‘घर घर सोलर’ योजना और सरकार की सब्सिडी व्यवस्था के जरिए बिहार में घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर 999 रुपये के डाउन पेमेंट और 60 महीने की ईएमआई की सुविधा उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जो एकमुश्त बड़ी रकम खर्च किए बिना अपने घर पर रूफटॉप सोलर लगवाना चाहते हैं।

कुल मिलाकर, बिहार में रूफटॉप सोलर को लेकर सामने आई यह योजना उपभोक्ताओं के लिए एक नया वित्तीय विकल्प पेश करती है। 999 रुपये के शुरुआती भुगतान से लेकर 1 किलोवाट के लिए 932 रुपये और 3 किलोवाट के लिए 2,907 रुपये की मासिक ईएमआई तक, योजना का फोकस सोलर सिस्टम की शुरुआती लागत को किस्तों में बांटकर भुगतान को आसान बनाने पर है। अगले तीन वर्षों में 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य इस पहल के बड़े स्तर को दर्शाता है।