देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 से जुड़े पेपर लीक मामले ने अब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। राजस्थान में आरोपी दिनेश बिंवाल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। विपक्ष लगातार राज्य की Bharatiya Janata Party सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि गिरफ्तार आरोपी बीजेपी से जुड़ा कार्यकर्ता है और उसके पार्टी नेताओं से सीधे संबंध रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है।


कांग्रेस ने पूछा- ‘9 दिन तक मामला क्यों दबाया गया?’

मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आरोपी के राजनीतिक संबंधों की वजह से राज्य सरकार ने 9 दिनों तक मामले को दबाकर रखा और एफआईआर दर्ज करने में देरी की। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ पुरानी पोस्ट्स में दिनेश बिंवाल को बीजेपी का “ऊर्जावान कार्यकर्ता” बताया गया था। इसी आधार पर विपक्ष सरकार पर राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है। हालांकि अब तक बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


आरोपी पर पेपर खरीदकर बेचने का आरोप

एसओजी सूत्रों के मुताबिक, दिनेश बिंवाल उन लोगों में शामिल बताया जा रहा है, जिन पर NEET UG 2026 का पेपर खरीदने और फिर उसे आगे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के आरोप लगे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर पेपर गुरुग्राम के एक डॉक्टर से लिया गया और फिर उसे कई छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क की भी जांच होनी चाहिए। इस मामले ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


छात्रों के गुस्से के बीच बढ़ी सियासी लड़ाई

पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हर साल किसी न किसी बड़ी परीक्षा में गड़बड़ी की खबरें क्यों सामने आती हैं। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस इसे सरकार की विफलता बता रही है, जबकि बीजेपी पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी दोनों इस मामले को और गर्मा सकती हैं।