नई दिल्ली:

सर्गेई लावरोव BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं। रूस के विदेश मंत्री के इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत-रूस संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली पहुंचने पर भारतीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उनके दौरे के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, BRICS समिट में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हाल के वर्षों में BRICS समूह का वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में प्रभाव लगातार बढ़ा है। यही वजह है कि इस बैठक पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

सर्गेई लावरोव ऐसे समय भारत पहुंचे हैं जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, पश्चिमी देशों और रूस के बीच बढ़ता तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था जैसे मुद्दों पर BRICS देशों के बीच चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS अब सिर्फ एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में विकासशील देशों की आवाज के रूप में भी उभर रहा है। सदस्य देश लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले। ऐसे में इस समिट को रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

भारत और रूस के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी रही है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, परमाणु सहयोग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग देखा जाता रहा है। रूस लंबे समय से भारत का बड़ा रक्षा साझेदार रहा है। वहीं भारत भी रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित तरीके से बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि सर्गेई लावरोव के इस दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हो सकती है। इसमें व्यापार बढ़ाने, ऊर्जा सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने का मुद्दा भी इस बैठक में उठ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सदस्य देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने और आपसी व्यापार को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। जानकारों का कहना है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच BRICS देशों की रणनीति और अहम हो गई है।

हाल के समय में BRICS समूह का विस्तार भी चर्चा का विषय रहा है। कई अन्य देश भी इस समूह में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस समिट में संगठन के भविष्य और उसके विस्तार को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारत इस मंच का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए कर सकता है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में संतुलन जरूरी है और विकासशील देशों को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए।

दिल्ली में आयोजित इस समिट को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। राजधानी के कई इलाकों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। विदेशी प्रतिनिधियों के आगमन को देखते हुए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। विदेश मंत्रालय और अन्य सरकारी एजेंसियां कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी हुई हैं।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इस समय दुनिया जिस तरह के राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है, उसमें BRICS देशों की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव, चीन-अमेरिका प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच यह मंच सदस्य देशों के लिए साझा रणनीति बनाने का अवसर बन सकता है।

सर्गेई लावरोव का भारत दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अब तक संतुलित रुख अपनाया है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की बात करता रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल सभी की नजर BRICS समिट में होने वाली बैठकों और उससे निकलने वाले फैसलों पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि यह बैठक वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय रणनीति को लेकर कई बड़े संकेत दे सकती है।