पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी | Source: Abp Newsपूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी Source : Abp News

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर आयोजित ‘संसद मार्च’ के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वायरल वीडियो में विजेता दहिया नेताजी सुभाष पैलेस मेट्रो स्टेशन पर बर्गर खाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि जिस समय जंतर-मंतर पर पार्टी के कार्यकर्ता और छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, उस दौरान वह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे। वीडियो सामने आने के बाद पहले सोशल मीडिया पर सवाल उठे और अब इस मामले में पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने विजेता दहिया की गैरमौजूदगी और उनकी नैतिक जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने पूछा- क्या प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे विजेता दहिया?

वीडियो वायरल होने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “तो क्या CJP के प्रवक्ता विजेता दहिया, जो हर मंच पर नाचते-गाते रहे हैं और जिन्होंने स्वामी प्रेमानंद महाराज का अपमान किया, वह कल विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए? क्या यह सही है?” इसके बाद एक यूजर ने उन्हें जवाब देते हुए दावा किया कि विजेता दहिया प्रदर्शन के दौरान बर्गर खाते नजर आए थे। इस पर प्रियंका चतुर्वेदी ने एक और पोस्ट में कहा कि विजेता दहिया का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खुद को जवाबदेह नहीं बता रहे हैं क्योंकि वह कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या उनमें कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं है?” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।

क्या है पूरा मामला, विजेता दहिया ने क्या दी सफाई?

दरअसल, सोमवार (20 जुलाई) को जंतर-मंतर पर ‘संसद मार्च’ के दौरान CJP के कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी मौजूद थे। इसी बीच विजेता दहिया का नेताजी सुभाष पैलेस मेट्रो स्टेशन पर बर्गर खाते हुए वीडियो सामने आया। वीडियो में दो युवकों ने उनसे सवाल किया कि जब पार्टी के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो वह वहां क्यों नहीं पहुंचे और क्या उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अकेला छोड़ दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद विजेता दहिया ने सफाई देते हुए कहा कि वह कई रातों से लगातार नहीं सोए थे, इसलिए प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। हालांकि उनकी इस सफाई के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। छात्र संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के नेता भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिससे यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।