
डिंपल यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया, उनके हाथ में चोट लग गई Source : aaj tak
नई दिल्ली:राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश में बड़े छात्र आंदोलन और भारी राजनीतिक सरगर्मी का मुख्य केंद्र बन गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, NEET-UG पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली के खिलाफ हफ्तों से चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को अब विपक्षी दलों का खुला और पुरजोर समर्थन मिल रहा है। इसी सिलसिले में समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता और सांसद डिंपल यादव के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं ने संसद भवन से जंतर-मंतर की ओर एक विशाल विरोध मार्च निकाला। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए डिंपल यादव और उनके सहयोगियों को रास्ते में ही रोककर एहतियातन हिरासत में ले लिया, जिसके बाद संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारा बेहद गर्म हो गया है।
परीक्षा धांधली के विरोध में संसद से सड़क तक संग्राम
NEET और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई विसंगतियों को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रों के इसी आक्रोश को संसद के भीतर और बाहर पुरजोर तरीके से उठाने के लिए समाजवादी पार्टी ने इस पैदल मार्च की रूपरेखा तैयार की थी। डिंपल यादव के नेतृत्व में सपा सांसदों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर संसद परिसर से बाहर निकला और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगा। मार्च में शामिल नेता सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर रहे थे। जैसे ही यह मार्च संसद मार्ग पर आगे बढ़ा, वहां पहले से ही भारी संख्या में तैनात दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। पुलिस अधिकारियों ने नेताओं को समझाया कि संसद के आसपास के पूरे इलाके में धारा 144 लागू है, जिसके तहत किसी भी तरह के जुलूस या मार्च की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे, तो पुलिस और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद पुलिस ने डिंपल यादव सहित कई सांसदों को जबरन बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया।
युवाओं के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल
जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है, जिसे कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों का समर्थन प्राप्त है। प्रदर्शनकारी छात्रों और उन्हें समर्थन दे रहे नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि वर्तमान परीक्षा ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था अब भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भेंट चढ़ चुकी है, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले होनहार छात्रों का भरोसा टूट गया है। देश का युवा आज मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय पुलिस के बल पर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। सपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक देश के नौजवानों को इंसाफ नहीं मिल जाता और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह फुलप्रूफ नहीं बना दिया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष सड़कों पर जारी रहेगा।
पुलिसिया कार्रवाई पर विपक्षी दलों का तीखा राजनीतिक पलटवार
सपा नेताओं को हिरासत में लिए जाने की इस घटना के बाद देश भर में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे जनप्रतिनिधियों और देश के भविष्य यानी युवाओं पर इस तरह की दमनकारी पाबंदियां लगाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार युवाओं के रोजगार और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है और अपने अहंकार में चूर होकर विपक्ष की आवाज को कुचलना चाहती है। इस घटना के बाद जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है तथा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर एक बड़े गतिरोध का कारण बन सकता है।
