
योगा दिवस से पहले बयान देते हुए बाबा रामदेव।Source : Social media
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले योग गुरु बाबा रामदेव का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि आज भले ही लोग हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध जैसे अलग-अलग धर्मों और समुदायों से जुड़े हों, लेकिन हम सभी का "डीएनए योग वाला" है। बाबा रामदेव के मुताबिक योग केवल एक व्यायाम या स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन परंपरा और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि योग किसी एक धर्म, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम है। योग दिवस से पहले दिए गए उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों तक चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे योग के सार्वभौमिक स्वरूप से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं।
क्या बोले बाबा रामदेव?
एक इंटरव्यू के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन केवल धार्मिक प्रवचन या किसी विचारधारा का विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा में योग का विशेष स्थान रहा है और हम सभी किसी न किसी रूप में योग की विरासत से जुड़े हुए हैं। बाबा रामदेव के अनुसार, आज भले ही लोग अलग-अलग धर्मों और समुदायों से संबंध रखते हों, लेकिन योग एक ऐसी शक्ति है जो सभी को जोड़ने का काम करती है। उनका कहना है कि योग किसी एक धर्म की पहचान नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का माध्यम है।
योग को बताया जीवन का आधार
बाबा रामदेव ने कहा कि वह पिछले लगभग पांच दशकों से योग का अभ्यास कर रहे हैं और करीब 35 से 40 वर्षों से लोगों को योग सिखाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में योग की उपयोगिता और भी बढ़ेगी, क्योंकि यह केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तनाव, चिंता और अवसाद जैसी कई समस्याओं को नियंत्रित करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों का समाधान योग और संतुलित दिनचर्या में छिपा हुआ है।
योग किसी धर्म से नहीं जुड़ा: रामदेव
बाबा रामदेव ने एक बार फिर साफ किया कि योग को किसी धर्म, जाति या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि योग एक सार्वभौमिक जीवनशैली और स्वास्थ्य प्रणाली है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि योग करने से किसी की धार्मिक पहचान नहीं बदलती, बल्कि यह व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। बाबा रामदेव के मुताबिक, दुनिया भर के लोग बिना किसी धार्मिक भेदभाव के योग को अपना रहे हैं और इसके लाभ उठा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आया बयान
बाबा रामदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश और दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां चल रही हैं। इसलिए उनके इस बयान को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। बाबा रामदेव के अनुसार, आज दुनिया के कई देशों में लोग नियमित रूप से योग कर रहे हैं और इसे स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बना रहे हैं। उनका मानना है कि योग अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है।
