नई दिल्ली:
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि भारत में ओरल कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आने वाले वर्षों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ओरल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है—चाहे वह गुटखा, पान मसाला, बीड़ी या सिगरेट के रूप में हो। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, तंबाकू का बढ़ता इस्तेमाल इस बीमारी को तेजी से फैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मुंह में छाले, सफेद या लाल धब्बे, बार-बार दर्द या सूजन जैसे संकेतों को लोग सामान्य समझ लेते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है। जब तक इसका पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है।
ICMR ने यह भी बताया कि सिर्फ तंबाकू ही नहीं, बल्कि शराब का अधिक सेवन और खराब ओरल हाइजीन भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण भी एक उभरता हुआ कारण बनकर सामने आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग न तो नियमित चेकअप कराते हैं और न ही शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेते हैं। ऐसे में बीमारी तेजी से फैलती है और इलाज मुश्किल हो जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और विभिन्न संस्थाएं लगातार लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी भी बहुत काम किए जाने की जरूरत है। ICMR ने लोगों से अपील की है कि वे तंबाकू और शराब से दूरी बनाए रखें और नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं।
कुल मिलाकर, ओरल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे सही समय पर पहचाना जाए तो इससे बचाव संभव है। लेकिन इसके लिए जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है।
