erer | Source: ereeपटना: बिहार के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों से जुड़ा शिक्षा विभाग का एक बड़ा फैसला सामने आया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के बाद विद्यार्थियों की मार्कशीट पर अब ‘FAIL’ शब्द नहीं दिखाई देगा। शिक्षा मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की स्वीकृति से शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है। सरकार का उद्देश्य कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों का मनोबल बनाए रखना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए कौशल विकास का अवसर उपलब्ध कराना है।

कम अंक का मतलब प्रतिभा की कमी नहीं, शिक्षा मंत्री ने बताई सरकार की सोच

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि बच्चों और बच्चियों के बेहतर भविष्य के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी। उनके अनुसार, सभी बच्चे सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं और यदि कोई विद्यार्थी किसी परीक्षा में कम अंक प्राप्त करता है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसमें प्रतिभा की कमी है। कई बार परिस्थितियों के कारण विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

इसी सोच के तहत शिक्षा विभाग ने परीक्षा परिणाम से जुड़े प्रमाणपत्रों पर ‘FAIL’ शब्द नहीं लिखने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन में नकारात्मक भावना पैदा होने से रोकना और उनका आत्मविश्वास बनाए रखना है।

‘FAIL’ की जगह अब लिखा जाएगा ‘Eligible for Skill and BBOSE’

मिथिलेश तिवारी के अनुसार, जिन विद्यार्थियों के अंक अपेक्षाकृत कम होंगे, उनके प्रमाणपत्र पर ‘FAIL’ शब्द के स्थान पर ‘Eligible for Skill and BBOSE’ लिखा जाएगा। इसके जरिए ऐसे विद्यार्थियों के लिए आगे कौशल विकास से जुड़े अवसरों की दिशा में रास्ता तैयार करने की बात कही गई है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि परीक्षा में किसी विद्यार्थी का प्रदर्शन उसके पूरे भविष्य का निर्धारण नहीं करता। कम अंक आने की स्थिति में भी विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और अपनी क्षमता के अनुसार नए कौशल विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।

शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया फैसला

शिक्षा मंत्री ने बताया कि गुरुवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में अधिकारियों के साथ विद्यार्थियों के प्रदर्शन में सुधार और उनके बेहतर भविष्य को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान परीक्षा परिणाम और विद्यार्थियों के मनोबल से जुड़ा यह निर्णय सामने आया।

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार ‘चिंतन से परिवर्तन’ और ‘रिफॉर्म से परफॉर्म’ के विचार के साथ काम कर रही है। शिक्षा विभाग के इस फैसले को इसी दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर बताया गया है।

शिक्षकों के तबादले पर भी शिक्षा मंत्री का बड़ा अपडेट

शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के ऐच्छिक तबादले को लेकर भी सरकार की तैयारी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों के उनकी सुविधा के अनुसार तबादले के लिए संकल्पित है। सितंबर 2026 में इस प्रक्रिया पर जोर-शोर से काम किए जाने की बात कही गई है।

मिथिलेश तिवारी के अनुसार, अब तक 37 हजार शिक्षकों को उनकी पसंद के अनुसार तबादले का मौका दिया जा चुका है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी शिक्षक द्वारा दिए गए 30 विकल्पों में सीट उपलब्ध नहीं होती है, तो संबंधित शिक्षक से बातचीत करके तबादले का रास्ता निकाला जाए।

जबरन तबादला नहीं करने के निर्देश

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में शिक्षकों का जबरन तबादला नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अवसर दिया जाएगा और उसी आधार पर तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि पांच साल की ट्रांसफर पॉलिसी लागू होगी। उन्होंने शिक्षकों को नैतिक रूप से उन्नत बताते हुए उम्मीद जताई कि वे नियम-कानून का पालन करते हुए अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प का चयन करेंगे और तबादला प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

TRE-4 में बढ़ीं सीटें, अब कुल 33,385 पद

शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि TRE-4 में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। संगीत विषय में 111 सीटें बढ़ाई गई हैं और अब कुल सीटों की संख्या 33 हजार 385 हो गई है।

शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इसे महत्वपूर्ण जानकारी माना जा रहा है। विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों से जुड़े आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आदेश पर TRE-4 में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बजाय एकल परीक्षा लेने का निर्णय किए जाने की भी जानकारी शिक्षा मंत्री ने दी।

लाइब्रेरियन और कंप्यूटर शिक्षक की भर्ती की भी तैयारी

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शिक्षा विभाग जल्द ही लाइब्रेरियन और कंप्यूटर शिक्षक की बहाली की दिशा में भी काम करेगा। उन्होंने बताया कि विभाग इस संबंध में तैयारी कर रहा है।

शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के तबादले, TRE-4 की सीटों में बढ़ोतरी और आने वाली भर्तियों से जुड़े कदमों के साथ विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम को लेकर लिया गया फैसला शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलावों की ओर इशारा करता है।

छात्रों के मनोबल पर सरकार का जोर

शिक्षा मंत्री के बयान के मुताबिक, परीक्षा में कम अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को केवल उनके परिणाम के आधार पर हतोत्साहित करने के बजाय उन्हें आगे की शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ‘FAIL’ शब्द हटाकर ‘Eligible for Skill and BBOSE’ लिखने का फैसला इसी सोच से जुड़ा बताया गया है।

सरकार का तर्क है कि प्रत्येक विद्यार्थी की परिस्थितियां अलग होती हैं और परीक्षा में कम अंक आना उसकी प्रतिभा या भविष्य की संभावनाओं का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे विद्यार्थियों को नए कौशल हासिल करने का अवसर देकर आगे बढ़ने का रास्ता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।