दुनिया एक बार फिर Ebola virus disease को लेकर चिंता में है। इस बार खतरे की वजह Ebola का Bundibugyo strain (बुंडीबुग्यो स्ट्रेन) है, जिसने अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में World Health Organization ने कांगो और युगांडा में फैले इस संक्रमण को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency of International Concern) घोषित किया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है।

क्या है Bundibugyo strain?

Bundibugyo strain, Ebola वायरस का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसे पहली बार साल 2007 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में पहचाना गया था। यह Ebola वायरस के उन चार प्रमुख प्रकारों में शामिल है, जो इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। यह स्ट्रेन बाकी Ebola प्रकारों की तरह ही गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है और कई मामलों में जानलेवा भी साबित होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, Bundibugyo strain की मृत्यु दर (Fatality Rate) करीब 25% से 50% तक हो सकती है। यानी हर दो संक्रमित मरीजों में से एक की मौत तक हो सकती है। हालांकि, समय पर इलाज और मेडिकल सपोर्ट मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे फैलता है यह वायरस?

Ebola का यह स्ट्रेन मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के सीधे संपर्क से फैलता है। माना जाता है कि फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit Bats) इसका प्राकृतिक स्रोत हो सकते हैं। संक्रमित जानवरों के खून, शरीर के तरल पदार्थ या ऊतकों के संपर्क में आने से इंसानों में संक्रमण फैल सकता है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार, मल, मूत्र या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से यह दूसरे लोगों तक पहुंचता है।

यह वायरस हवा से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करने वाले लोग, डॉक्टर, नर्स या परिवार के सदस्य सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं। संक्रमित शव को छूने से भी संक्रमण फैल सकता है, इसलिए Ebola प्रभावित इलाकों में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।


क्या हैं इसके लक्षण?

Bundibugyo strain के लक्षण शुरुआत में सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर लक्षण दिख सकते हैं। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश और थकान शामिल हैं। बीमारी बढ़ने पर मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गंभीर कमजोरी महसूस हो सकती है। गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर से ब्लीडिंग (खून बहना) भी शुरू हो सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षण फ्लू या मलेरिया जैसे दिखने के कारण कई बार मरीजों की पहचान देर से होती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।


भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

फिलहाल भारत में Ebola का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे पूरी तरह नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक कनेक्टिविटी के कारण संक्रमित व्यक्ति दूसरे देशों तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए तत्काल बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।


भारत में पहले भी Ebola को लेकर निगरानी तंत्र सक्रिय रहा है। एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग, संदिग्ध यात्रियों की मेडिकल जांच और आइसोलेशन की व्यवस्था जैसी तैयारियां पहले भी अपनाई गई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।

क्यों बढ़ी है वैश्विक चिंता?

इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि Bundibugyo strain के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। Ebola के दूसरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन मौजूद है, लेकिन इस प्रकार के लिए अभी केवल सहायक इलाज (Supportive Care) ही विकल्प है। वहीं कांगो और युगांडा में सीमावर्ती आवाजाही, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के कारण संक्रमण को रोकना मुश्किल हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन जागरूक रहना जरूरी है। अगर समय रहते संक्रमित व्यक्ति की पहचान हो जाए और उसे आइसोलेट कर दिया जाए, तो वायरस के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि अफ्रीका में यह संक्रमण कितनी तेजी से फैलता है और स्वास्थ्य एजेंसियां इसे नियंत्रित करने में कितनी सफल होती हैं।