रायपुर: नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बीच रायपुर के पांच दोस्तों की जिंदगी महज 10 से 15 मिनट के अंतर से बच गई। 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ के दौरान ये पांचों दोस्त धादिंग जिले के मलेखू कस्बे में एक होटल पर चाय पीने के लिए रुक गए थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि आगे मौजूद एक पुल बाढ़ के पानी में बह चुका है। अगर वे चाय के लिए वहां नहीं रुकते और कुछ मिनट पहले आगे बढ़ जाते, तो वे भी बाढ़ की चपेट में आ सकते थे।
10 मिनट की देरी ने बदल दिया पूरा सफर
रायपुर के माणा कैंप क्षेत्र के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर 21 अगस्त को रायपुर से नेपाल यात्रा के लिए निकले थे। सभी की उम्र 50 से 60 वर्ष के बीच है। अगले दिन वे नेपाल पहुंच गए थे। पांचों दोस्तों ने एक कार किराये पर ली थी और पशुपतिनाथ मंदिर, मनोकामना मंदिर समेत अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करने की योजना बनाई थी।
26 अगस्त को पूर्वाह्न करीब 9:30 से 10 बजे के बीच पांचों धादिंग जिले के मलेखू कस्बे में एक होटल पर चाय पीने के लिए रुके। उस समय शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर बाद यही छोटा-सा ठहराव उनकी जिंदगी बचाने वाला साबित होगा।
सैलून चलाने वाले 53 वर्षीय नारायण सेन ने मीडिया को बताया कि वे भाग्यशाली थे कि अचानक बाढ़ आने के समय चाय पीने के लिए रुक गए। उनके मुताबिक अगर वे 10 से 15 मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो शायद बाढ़ के बीच फंस सकते थे। होटल में उन्हें आगे पुल बह जाने की जानकारी मिली।
होटल में मिली मदद, वहीं से दिखा तबाही का मंजर
नारायण सेन के मुताबिक मलेखू के जिस होटल में वे रुके थे, वह एक भारतीय व्यक्ति का था। होटल संचालक ने उनकी काफी मदद की और उन्हें भोजन भी उपलब्ध कराया। इसके बाद पांचों दोस्तों ने उसी क्षेत्र में रहकर हालात सामान्य होने का इंतजार किया।
लेकिन जिस आपदा से बचकर वे रुके थे, उसका भयावह असर उनकी आंखों के सामने था। उन्होंने त्रिशूली नदी में तेज बहाव के साथ कारों को बहते देखा। पानी में शव और कई अन्य सामान भी बह रहे थे। इस दृश्य ने पांचों दोस्तों को बुरी तरह डरा दिया।
सेन ने बताया कि लगातार यह डर बना हुआ था कि बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे हालात में समूह ने मलेखू में एक ऊंची जगह पर शरण ली और रात अपनी कार में बिताई। इस दौरान स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने उनकी सहायता की।
‘जो देखा, उसे शब्दों में बताना मुश्किल’
पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात 55 वर्षीय दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि बाढ़ आने के समय वे पशुपतिनाथ मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर थे। उन्होंने बताया कि जब वे होटल में चाय पी रहे थे, तभी अचानक आसपास के लोगों में बेचैनी बढ़ने लगी।
बाद में उन्हें बाढ़ से हुई तबाही के बारे में जानकारी मिली। ठाकुर के मुताबिक उन्होंने सुना कि कई गांव, इमारतें, कार्यालय और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गई हैं। इसके बाद वे त्रिशूली नदी के किनारे हालात देखने भी गए।
ठाकुर ने कहा कि वहां उन्होंने जो कुछ देखा, उसे शब्दों में बयां करना बेहद मुश्किल है। बाढ़ की भयावहता के बीच पांचों दोस्त लगातार भगवान शिव का नाम जपते रहे। ठाकुर ने कहा कि उन्हें लगता है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी रक्षा हुई।
बिजली और पानी नहीं था, फिर भी प्रशासन ने संभाला
बाढ़ के बाद मलेखू में हालात बेहद कठिन थे। ठाकुर के अनुसार वहां बिजली और पानी की सुविधा प्रभावित हो गई थी। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने उनकी मदद की। अधिकारियों ने उन्हें ऊंची जगह पर रहने की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।
ठाकुर ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग की सराहना की। संकट के समय मिली इस सहायता ने पांचों दोस्तों को मुश्किल हालात में सुरक्षित रहने में मदद की।
इंटरनेट से परिवारों के संपर्क में रहे
नेपाल में फंसे रहने के दौरान पांचों दोस्तों के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि इंटरनेट सेवा काम कर रही थी। वे इंटरनेट के जरिए लगातार अपने परिवारों के संपर्क में रहे और अपनी स्थिति की जानकारी देते रहे।
समूह ने भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपनी स्थिति साझा की। ठाकुर ने बताया कि इंटरनेट सेवा अच्छी तरह काम कर रही थी, इसलिए वे अपने परिवारों से संपर्क में रह सके और घबराहट के बावजूद पूरी तरह अकेले नहीं पड़े।
बाढ़ के बीच महिला सुरक्षा कर्मियों ने बांधी राखी
इस भयावह यात्रा के बीच पांचों दोस्तों के लिए एक भावुक और यादगार पल भी आया। स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। यह पल उनके लिए संकट के बीच राहत और अपनापन देने वाला रहा।
ठाकुर ने बताया कि वे रक्षाबंधन के बाद यात्रा से लौटने वाले थे और उनकी बहनों ने उन्हें पहले ही राखी दे दी थी। नेपाल में तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी कलाई पर वही राखियां बांधीं। ठाकुर के अनुसार यह उनके लिए सबसे सुकून भरा पल था।
‘इन दृश्यों को जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे’
सिलाई की दुकान चलाने वाले दिनेश ओझा ने नेपाल में बाढ़ के बाद देखे गए मंजर को बेहद भयावह बताया। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ उन्होंने देखा, उसे वह जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।
ओझा के मुताबिक कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में परेशान होकर इधर-उधर भटक रहे थे। बाढ़ ने लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया था और हर तरफ चिंता का माहौल था।
पांचों दोस्तों ने जिस कार में यात्रा की थी, उसी में रात बिताई। लेकिन हालात इतने डरावने थे कि वे ठीक से सो भी नहीं पाए। उन्हें हर समय यह आशंका बनी हुई थी कि कहीं दोबारा बाढ़ का पानी न बढ़ जाए।
28 अगस्त को नेपाल से निकले, अब घर लौटकर राहत
बाढ़ के बीच दो दिन तक मुश्किल परिस्थितियों में रहने के बाद पांचों दोस्तों का समूह आखिरकार 28 अगस्त को नेपाल से रवाना हुआ। इसके बाद वे सुरक्षित अपने घर रायपुर लौट आए।
घर पहुंचने के बाद पांचों के लिए राहत की सबसे बड़ी वजह यही थी कि वे एक भयावह प्राकृतिक आपदा के बीच से सुरक्षित निकल आए। उनके अनुसार यात्रा की शुरुआत धार्मिक और पर्यटन स्थलों के दर्शन के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने इस यात्रा को जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बना दिया।
एक छोटी-सी चाय ने बचा ली पांच जिंदगियां
रायपुर के इन पांच दोस्तों की आपबीती में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मलेखू में चाय के लिए लिया गया महज 10 से 15 मिनट का विराम उनके लिए जीवन और खतरे के बीच का अंतर बन गया। यदि वे उस समय वहां नहीं रुकते और पहले ही आगे निकल जाते, तो जिस पुल के बह जाने की जानकारी उन्हें होटल में मिली, उसी रास्ते पर वे भी फंस सकते थे।
बाढ़ के बीच बहती कारें, नदी में बहते शव, प्रभावित गांव और इमारतें तथा दो रातों तक बना डर उनके लिए इस यात्रा की सबसे भयावह यादें बन गईं। वहीं स्थानीय लोगों, प्रशासन और पुलिस की मदद, परिवारों से संपर्क और महिला सुरक्षा कर्मियों द्वारा बांधी गई राखी ने इस कठिन समय में उन्हें भावनात्मक सहारा भी दिया।
