दरभंगा: प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में संशोधन के विरोध में सोमवार को दरभंगा में शिक्षकों और कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा ने विश्वविद्यालय मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित कानून को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शिक्षकों के अधिकार और उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। इस दौरान चौरंगी से विश्वविद्यालय मुख्यालय तक मार्च निकाला गया, जो बाद में सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शन के अंत में संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित संशोधन वापस लेने की मांग रखी।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म होने का आरोप
शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे प्रस्तावित कानून से महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 500 महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों से अलग कर इंटर काउंसिल जैसी व्यवस्था के तहत संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। उनके अनुसार, यदि ऐसा हुआ तो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और इसका सीधा असर उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।
डॉ. निलेश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की सेवा शर्तों और अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समेत शिक्षकों के अन्य अधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि इससे कॉलेजों में पढ़ाई और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

11 से 18 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर करेंगे विरोध
शिक्षक संघ के महासचिव ने कहा कि शिक्षक प्रस्तावित कानून के विरोध में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेंगे। इसके तहत 11 से 18 अगस्त तक शिक्षक कॉलेजों में काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। साथ ही सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं को भी बुलाया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि प्रस्तावित कानून से उनके अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था पर किस तरह का असर पड़ सकता है।
शिक्षकों को बार-बार सचिवालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे
प्रक्षेत्रीय मंत्री विनय कुमार झा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया है, जिसका शिक्षक और कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को बिहार के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिसमें शिक्षक और कर्मचारी दोनों शामिल हुए।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधान पार्षद डॉ. मदन मोहन झा ने भी प्रस्तावित कानून को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इससे विश्वविद्यालयों का केंद्रीकरण बढ़ेगा और विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इस व्यवस्था से खुश नहीं होंगे। यदि सभी अधिकारों को केंद्रीयकृत किया गया तो शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मियों की परेशानी बढ़ सकती है।
डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही कामकाज को लेकर कई तरह की समस्याएं हैं। ऐसे में नई केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने पर शिक्षकों को अपने काम के लिए बार-बार सचिवालय का चक्कर लगाना पड़ सकता है। इससे व्यवस्था और जटिल होगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियम से शिक्षकों को कोई लाभ नहीं होगा और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों के अस्तित्व पर भी इसका असर पड़ सकता है।

प्रदर्शन में ये लोग रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा की अध्यक्षता डॉ. शशि भूषण कुमार ने की। इसका संचालन शंकर सिंह और डॉ. शशि भूषण कुमार के संयुक्त नेतृत्व में हुआ। सभा को गंगा प्रसाद झा, डॉ. निलेश कुमार, विनय कुमार झा, अजीत कुमार चौधरी, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ. लव कुमार सिंह, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. प्रवीण कुमार प्रभंजन, डॉ. शंभू ठाकुर, शंकर यादव, कुलदीप कुमार झा, प्रमोद कुमार, महेंद्र महान और मो. शमशाद अली समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया।
प्रदर्शन के अंत में संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में किए जा रहे संशोधन को वापस लेने, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने और शिक्षकों-कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
