नई दिल्ली। आदिवासी छात्रों की समस्याओं और महाराष्ट्र के सरकारी छात्रावासों से जुड़े मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पत्र पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखा पलटवार किया है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने का आग्रह किया था। इसके जवाब में महाराष्ट्र बीजेपी ने राहुल गांधी से कहा कि उन्हें पहले तेलंगाना और कर्नाटक में अपनी पार्टी की सरकारों के अधीन चल रहे आदिवासी कल्याण विभागों और छात्रावासों की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
राहुल गांधी ने फडणवीस से क्यों की थी हस्तक्षेप की मांग?
राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की ओर से उठाई जा रही समस्याओं का समाधान करने की मांग की थी। उनके मुताबिक राज्य संचालित छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी छात्र उम्र सीमा और कथित रूप से अपमानजनक नियमों के खिलाफ पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने और उनकी शिकायतों का जल्द समाधान करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से सरकारी छात्रावासों में रहने के लिए लागू 30 वर्ष की आयु सीमा जैसी शर्तों में राहत देने की मांग का उल्लेख किया।
बीजेपी ने कहा-‘हमें आपसे निष्पक्ष राय की उम्मीद नहीं’
राहुल गांधी के पत्र के जवाब में महाराष्ट्र बीजेपी ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट जारी किया। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी को महाराष्ट्र के मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले तेलंगाना और कर्नाटक में आदिवासी कल्याण विभागों और छात्रावासों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इन दोनों राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है।
बीजेपी ने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी पर महाराष्ट्र में आदिवासी स्कूलों से जुड़े कांग्रेस नेताओं को बचाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी, हमें आपसे निष्पक्ष या अच्छी तरह से रिसर्च की गई राय की उम्मीद नहीं है, लेकिन यहां कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनके बारे में जनता को पता होना चाहिए।”
बीजेपी ने महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों को लेकर क्या दावा किया?
सत्ताधारी दल ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में जिन कुछ आदिवासी स्कूलों को लेकर छात्र विरोध कर रहे हैं, उनका संचालन कांग्रेस नेताओं से जुड़े लोगों द्वारा किया जाता है। बीजेपी ने कहा कि इन संस्थानों की व्यवस्था और वहां की परिस्थितियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों को भी देखा जाना चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों को बीजेपी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी में कांग्रेस की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
पूर्व कांग्रेस सांसद से जुड़े स्कूल का बीजेपी ने किया जिक्र
बीजेपी ने अपने आरोपों के समर्थन में एक स्कूल का उल्लेख किया। पार्टी का दावा है कि कुछ दिन पहले एक स्कूल में तीन युवा लड़कियों की मौत हुई थी और उस स्कूल के निदेशक मारोतराव कोवासे हैं, जो पूर्व कांग्रेस सांसद हैं। बीजेपी के मुताबिक उनके बेटे विश्वजीत कोवासे गढ़चिरौली जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और स्कूल के सचिव हैं।
बीजेपी ने इन दावों को राहुल गांधी की ओर से महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर उठाए गए सवालों के जवाब के तौर पर सामने रखा।
यवतमाल के आश्रम स्कूल का भी उठाया मुद्दा
महाराष्ट्र बीजेपी ने यवतमाल के एक आश्रम स्कूल का भी जिक्र किया। पार्टी के अनुसार यह एक आवासीय स्कूल है, जहां निरीक्षण के दौरान लड़कियों के बाथरूम में कथित तौर पर दरवाजे नहीं होने की बात सामने आई। बीजेपी ने दावा किया कि यह स्कूल पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता वसंत पुरके से जुड़ा है।
बीजेपी ने इन उदाहरणों का हवाला देते हुए राहुल गांधी से कांग्रेस शासित राज्यों और कांग्रेस नेताओं से जुड़े संस्थानों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाने की मांग की।
कांग्रेस पर आदिवासी संस्थानों के गलत इस्तेमाल का आरोप
बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब महाराष्ट्र में कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने आदिवासी स्कूलों पर गलत तरीके से कब्जा किया और उनका दुरुपयोग किया। सत्ताधारी पार्टी ने विपक्षी दल के नेताओं पर आदिवासी समुदाय के शोषण का आरोप भी लगाया।
बीजेपी ने यह भी कहा कि संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई रोकने की कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी ने राहुल गांधी के पत्र को लेकर कांग्रेस पर राजनीतिक दोहरेपन का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने छात्राओं की किन समस्याओं का जिक्र किया था?
इस विवाद की शुरुआत राहुल गांधी की उस सोशल मीडिया पोस्ट और पत्र से हुई, जिसमें उन्होंने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने उन्हें सरकारी छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में बताया।
राहुल गांधी के मुताबिक छात्राओं ने छात्रावास में 30 वर्ष की उम्र की सीमा, कथित अपमानजनक नियमों, असुरक्षित सुविधाओं और महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी जांच जैसे प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
‘छात्राएं कोई खैरात नहीं मांग रहीं’, राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने छात्रों का ज्ञापन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजा गया अपना पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आने वाली छात्राएं कोई खैरात नहीं मांग रही हैं, बल्कि अपने जायज अधिकार की मांग कर रही हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस से प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की उम्मीद जताई थी।
10 दिन से भूख हड़ताल का दावा
राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दे के अनुसार आदिवासी छात्र राज्य संचालित छात्रावासों से संबंधित समस्याओं को लेकर पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उनकी प्रमुख शिकायतों में छात्रावास में रहने के लिए 30 वर्ष की आयु सीमा और अन्य कथित कठोर नियमों का मुद्दा शामिल था।
राहुल गांधी ने इन छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील की थी।
आदिवासी हॉस्टलों का मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों की समस्याओं से शुरू हुआ यह मामला अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। एक ओर राहुल गांधी ने छात्रावासों की सुविधाओं और नियमों को लेकर महाराष्ट्र सरकार से कार्रवाई की मांग की है, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए तेलंगाना और कर्नाटक की व्यवस्थाओं का सवाल उठाया है।
बीजेपी ने महाराष्ट्र के कुछ आदिवासी स्कूलों को लेकर भी कांग्रेस नेताओं से संबंध होने के आरोप लगाए हैं। इससे छात्रावास और आदिवासी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
बीजेपी का राहुल गांधी को सीधा जवाब
बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी को महाराष्ट्र की व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस शासित राज्यों में आदिवासी कल्याण विभागों और छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। पार्टी ने अपने आरोपों के जरिए यह सवाल उठाया कि कांग्रेस को आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर बोलने से पहले अपने प्रभाव वाले राज्यों की व्यवस्थाओं को भी देखना चाहिए।
वहीं राहुल गांधी ने अपने पत्र में महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है।
अब मुद्दा छात्रों की मांगों से आगे सियासी बहस तक पहुंचा
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रावासों को लेकर उठी शिकायतों ने अब राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। राहुल गांधी ने छात्रों की मांगों और कथित असुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल कदम उठाने की अपील की, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस शासित राज्यों और कांग्रेस नेताओं से जुड़े संस्थानों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए।
