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ED की पटना जोनल यूनिट ने बिहार के बांका जिले में अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को ED ने बिहार, दिल्ली और राजस्थान के कुल आठ ठिकानों पर रेड डाली। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत की जा रही है। ED के मुताबिक, यह मामला महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने कई सालों तक बड़े स्तर पर नियमों के खिलाफ बालू खनन किया। कंपनी का कंट्रोल राजस्थान के श्रीगंगानगर के चांदक परिवार के पास है। अशोक चांदक और उनके बेटे राघव चांदक कंपनी के प्रमुख लोगों में शामिल हैं।

फिलहाल ED की टीम कंपनी और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर दस्तावेज, कंप्यूटर और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध खनन से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

IIT पटना की रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा

ED की जांच के दौरान पता चला कि कंपनी कई वर्षों से बड़े पैमाने पर बालू निकाल रही थी, लेकिन इसकी पूरी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थी। मामले की सच्चाई जानने के लिए अक्टूबर 2024 में IIT पटना की मदद ली गई। संस्थान ने बांका जिले के बालू घाटों और आसपास के इलाकों का तकनीकी अध्ययन किया।

जांच के लिए सैटेलाइट तस्वीरों और दूसरे डिजिटल डेटा का इस्तेमाल किया गया। IIT पटना की रिपोर्ट में सामने आया कि साल 2015-16 से 2022-23 के बीच कंपनी ने तय सीमा से ज्यादा बालू का खनन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध तरीके से निकाली गई बालू की कीमत 131 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। जांच में यह भी पता चला कि जमीन पर जितना खनन हुआ, उसका पूरा ब्योरा खनन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था। इसी रिपोर्ट के आधार पर ED ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में पैसे का लेन-देन कैसे हुआ।

कई जगहों पर चल रही है ED की छापेमारी

जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर ED ने अपनी रिपोर्ट बिहार स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भेजी थी। इसके बाद बिहार सरकार के खान एवं भू-तत्व विभाग ने 21 अगस्त 2025 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की। फिलहाल पुलिस और दूसरी एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। इस मामले में ED की टीम बिहार, दिल्ली और राजस्थान के आठ अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ले रही है। इनमें बांका और पटना के दो ठिकाने, दिल्ली एनसीआर का एक ठिकाना और राजस्थान के श्रीगंगानगर व जयपुर की पांच जगहें शामिल हैं। छापेमारी के दौरान अधिकारी जरूरी कागजात, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि अवैध खनन से जुड़े पैसों का इस्तेमाल कहां किया गया।