पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर जारी असंतोष और बगावत की चर्चाओं के बीच अब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। उनके इस कदम को ममता बनर्जी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। लगातार सामने आ रहे इस्तीफों और नाराजगी की खबरों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर TMC के भीतर चल क्या रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुष्मिता देव ने राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से भी दूरी बना ली है। हालांकि इस्तीफे की घोषणा के साथ उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। लेकिन उनके फैसले ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज कर दिया है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह इस्तीफा?
सुष्मिता देव TMC की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती रही हैं और पूर्वोत्तर भारत में पार्टी का चेहरा भी मानी जाती थीं। ऐसे में उनका इस्तीफा सिर्फ एक सांसद के जाने भर का मामला नहीं है, बल्कि इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में TMC के कई नेताओं द्वारा नेतृत्व को लेकर असहमति जताने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद यह घटनाक्रम और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
BJP में जाने की अटकलें तेज
इस्तीफे के बाद सुष्मिता देव के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से हुई है, जिसके बाद उनके BJP में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
TMC के लिए बढ़ी चुनौती
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब TMC पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और विपक्ष के हमलों का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी के भीतर असंतोष की यह स्थिति आगे भी जारी रहती है, तो आने वाले समय में ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
