जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर। | Source: Chrome

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर।Source : Chrome

बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अब पहली बार खुद चुनाव लड़ने जा रहे हैं। सोमवार को वह बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। इसे केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता और जन सुराज की ताकत की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

पहली बार जनता के बीच उम्मीदवार के रूप में उतरेंगे प्रशांत किशोर

अब तक देश के कई बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर पहली बार खुद मतदाताओं से वोट मांगेंगे। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के जरिए उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति की औपचारिक शुरुआत हो रही है। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता का भी परीक्षण माना जा रहा है।

नामांकन से पहले होगा शक्ति प्रदर्शन

जन सुराज ने नामांकन को लेकर बड़े स्तर पर तैयारी की है। तय कार्यक्रम के अनुसार, सुबह पटना संग्रहालय के पास स्काउट एंड गाइड मैदान में सभा आयोजित होगी। इसके बाद समर्थकों के साथ रोड शो निकाला जाएगा, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पटना समाहरणालय पहुंचेगा। वहीं प्रशांत किशोर दोपहर में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

पार्टी का बड़ा दांव, खुद मैदान में उतरे पीके

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर ने खुद कोई चुनाव नहीं लड़ा था और संगठन विस्तार पर ध्यान दिया था। लेकिन हाल ही में जन सुराज की कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी की ओर से वही उम्मीदवार होंगे। प्रशांत किशोर पहले भी इस चुनाव को राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की राय का मौका बता चुके हैं।

क्यों खास है बांकीपुर सीट?

पटना के केंद्र में स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। यहां पिछले कई चुनावों में भाजपा को लगातार सफलता मिली है। ऐसे में प्रशांत किशोर का इसी सीट से चुनाव लड़ना राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उन्होंने आसान सीट के बजाय सीधे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के सामने उतरने का फैसला किया है।

भाजपा के सामने भी चुनौती

इस उपचुनाव में भाजपा को भी नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने पहले घोषित उम्मीदवार को बदलते हुए नया प्रत्याशी मैदान में उतारा है। विपक्ष इसे भाजपा की रणनीतिक मजबूरी बता रहा है, जबकि भाजपा इसे संगठन का सामान्य निर्णय बता रही है। ऐसे में यह मुकाबला दोनों पक्षों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है।

नामांकन से ही तेज होगी चुनावी जंग

आज का नामांकन केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी शक्ति प्रदर्शन का भी मंच बनेगा। जन सुराज बड़ी संख्या में समर्थकों को जुटाने की तैयारी में है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव का असर केवल बांकीपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में भी इसकी

अहम भूमिका हो सकती है।