
आजमगढ़
आजमगढ़। गांव के विकास की तस्वीर बदलने के लिए सिर्फ बड़े बजट ही नहीं, बल्कि योजनाओं को जमीन पर उतारने की इच्छाशक्ति भी जरूरी है। आजमगढ़ के मिर्जापुर ब्लॉक की बीनापारा ग्राम पंचायत इसका उदाहरण बनकर सामने आई है। करीब तीन हजार आबादी वाली इस पंचायत में ग्रामीणों को कई ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके लिए आमतौर पर उन्हें ब्लॉक, तहसील या शहर का रुख करना पड़ता है।
बीनापारा में तैयार कराया गया ग्राम सचिवालय इस बदलाव का सबसे प्रमुख केंद्र है। ग्राम सचिवालय के निर्माण के लिए पंचायत को 21.78 लाख रुपये का बजट मिला था। इसमें लगभग 19 लाख रुपये खर्च कर भवन को आधुनिक रूप दिया गया। यहां पंचायत से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कक्ष के साथ जन सुविधा केंद्र भी बनाया गया है। ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज संबंधी काम यहीं होने से ग्रामीणों को सरकारी काम के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हुई है।
सचिवालय से आगे बढ़ा विकास का दायरा
पंचायत में विकास कार्यों का दायरा केवल सरकारी कार्यालय तक सीमित नहीं रखा गया। बच्चों के लिए लाइब्रेरी, सामुदायिक मिलन केंद्र, हाट बाजार, अन्नपूर्णा भवन और मॉडल स्कूल जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। आंगनबाड़ी भवन, सामुदायिक शौचालय और खेल मैदान भी पंचायत की सुविधाओं में शामिल हैं।
गांव की आधारभूत व्यवस्था सुधारने के लिए सीसी रोड और इंटरलॉकिंग का काम कराया गया है। जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण और घरों से कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। पर्यावरण और ऊर्जा के स्तर पर भी पंचायत ने कदम उठाए हैं। गांव में 28 सोलर लाइट लगाई गई हैं, जबकि ग्राम सचिवालय में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस बीट कक्ष ने बढ़ाई सुविधा
बीनापारा के ग्राम सचिवालय में पुलिस बीट कक्ष का प्रावधान भी किया गया है। इसका मकसद ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर पुलिस से संपर्क की सुविधा देना है। पंचायत में शिक्षा, स्वच्छता, सड़क, ऊर्जा और सुरक्षा जैसी जरूरतों को एक साथ विकसित करने की कोशिश की गई है।
आठवीं तक पढ़े प्रधान की अलग सोच
इस पूरे बदलाव के पीछे ग्राम प्रधान असलम खान की भूमिका अहम बताई जा रही है। असलम खान ने आठवीं तक पढ़ाई की है और राजनीति में आने से पहले कबाड़ का कारोबार करते थे। प्रधान बनने के बाद उन्होंने पंचायत में उपलब्ध सरकारी योजनाओं और संसाधनों का इस्तेमाल कर सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया।
बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी उन्होंने विशेष पहल की। पंचायत भवन में बनाई गई लाइब्रेरी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, ताकि गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल और ऑनलाइन संसाधन मिल सकें।
असलम खान के मुताबिक गांव के लोगों को रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों के लिए शहर नहीं जाना पड़े, यही विकास की उनकी सोच है। उनका मानना है कि पंचायत में शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं बढ़ेंगी तो गांव के युवाओं को आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर मिलेंगे।
अभी और काम की तैयारी
पंचायत को सुविधाओं से लैस करने के बाद भी प्रधान का फोकस आगे के प्रोजेक्ट पर है। युवाओं के लिए जिम और मिनी स्टेडियम तैयार कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे गांव में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को बेहतर माहौल देने की कोशिश है।
बीनापारा में हुए कार्यों की मुख्य विकास अधिकारी परीक्षित खटाना ने भी सराहना की है। उनका कहना है कि पंचायत में जिस तरह सुविधाओं को विकसित किया गया है, उसी तर्ज पर जिले की दूसरी ग्राम पंचायतों में भी बेहतर व्यवस्थाएं तैयार करने का प्रयास किया जा सकता है।
बीनापारा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि यहां विकास को केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं रखा गया। शिक्षा, स्वच्छता, डिजिटल सुविधा, ऊर्जा, सुरक्षा और सामुदायिक जरूरतों को एक साथ जोड़कर पंचायत को सुविधासंपन्न बनाने की कोशिश की गई है।
