खुशबू खातून
नई दिल्ली:
भारत अपनी वायुसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर ऐतिहासिक रक्षा सौदा जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर जल्द ही उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। सौदा पूरा होने के बाद भारतीय वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी।
भारत में होगा बड़ा हिस्सा निर्माण
इस सौदे की सबसे अहम बात यह है कि राफेल विमानों के निर्माण में करीब 80 प्रतिशत काम भारत में ही किया जाएगा। इसके तहत ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। विमान निर्माण में भारतीय कंपनियों और स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा
राफेल एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा-से-हवा, हवा-से-जमीन और समुद्री हमलों में सक्षम है। इसकी तैनाती से भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और देश की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
रणनीतिक दृष्टि से अहम सौदा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए यह सौदा भारत के लिए बेहद अहम है। इससे न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी।
निष्कर्ष:
114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद भारत की रक्षा नीति में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह सौदा आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और राष्ट्रीय सुरक्षा—तीनों को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
