20–30 की उम्र में महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे PCOS के केस अब डॉक्टरों को भी चिंता में डाल रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नींद की कमी, बढ़ता तनाव और गलत खानपान इस हार्मोनल गड़बड़ी के बड़े कारण हैं। अगर इसे अनदेखा किया गया, तो आगे चलकर प्रजनन क्षमता और हार्ट हेल्थ दोनों पर असर पड़ सकता है।

भारत में आज के समय में कम उम्र की महिलाओं और लड़कियों में पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) के मामले पहले से अधिक सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ मेट्रो सिटीज ही नहीं, छोटे शहरों में भी अब यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टर्स बताते हैं कि 25 साल से कम उम्र की कई लड़कियां क्लिनिक में हार्मोनल इम्बैलेंस, वजन बढ़ने और पीरियड्स संबंधी समस्याओं के लिए कंसल्ट करने पहुंच रही हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इनकी संख्या और बढ़ सकती है। एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल क्राइसिस बता रहे हैं।

क्यों बढ़ रही हैं ये समस्याएं?

दिल्ली के ऑर्किड हॉस्पिटल की गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. रिचा सिंह का कहना है कि हर 5 में से 1 महिला पीसीओएस से पीड़ित है। काम का स्ट्रेस, देर रात तक स्क्रीन टाइम और असंतुलित डाइट ने शरीर के हार्मोनल सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जो इसका सबसे बड़ा कारण है।

सीताराम भरतिया इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च की सीनियर कंसल्टेंट और IVF एक्सपर्ट डॉ. प्रीति अरोड़ा धमिजा के मुताबिक, अब महिलाओं में हार्मोनल समस्याएं पहले की तुलना में बहुत जल्दी दिखने लगी हैं। जो समस्याएं पहले 30–35 की उम्र में होती थीं, अब 20–30 की उम्र में भी दिख रही हैं। अब फर्टिलिटी और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं भी पहले से कहीं ज्यादा और कम उम्र में ही सामने आ रही हैं। कई लड़कियों में 8–9 साल की उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो रहे हैं, जिससे ओवरी की क्षमता भी जल्दी प्रभावित हो सकती है।

लाइफस्टाइल, स्ट्रेस और नींद जिम्मेदार

डॉ. प्रीति का साफ कहना है कि आज की लाइफस्टाइल इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है। देर रात तक जागना, लगातार स्क्रीन पर रहना, जंक फूड खाना, अधिक स्ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है। इससे मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो कम उम्र में ही पीसीओएस के जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है।

उनका कहना है कि लगातार तनाव और खराब नींद सीधे हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है, ओवुलेशन प्रभावित होता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने पर फर्टिलिटी पर भी असर पड़ सकता है।

क्या है इसका इलाज?

सर गंगा राम हॉस्पिटल की डॉ. भवानी शेखर के अनुसार, कम उम्र में बढ़ता मोटापा, जंक फूड का सेवन, एक्सरसाइज की कमी और स्मोकिंग-अल्कोहल इस खतरे को कई गुना बढ़ा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि इसे सही समय पर लाइफस्टाइल बदलकर कंट्रोल किया जा सकता है। बैलेंस्ड डाइट, कम से कम 7–8 घंटे की नींद, स्ट्रेस मैनेजमेंट और रोजाना फिजिकल एक्टिविटी को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाकर हार्मोन को बैलेंस किया जा सकता है।