देशभर में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही देश के सबसे महत्वपूर्ण बारिश के मौसम की शुरुआत हो गई है। हालांकि इस साल मानसून सामान्य समय से करीब तीन दिन देरी से पहुंचा है, लेकिन अब इसके तेजी से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

बिहार में 12 से 15 जून, यूपी में 15 जून के बाद दस्तक

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक बिहार में मानसून 12 से 15 जून के बीच पहुंच सकता है। राज्य के कुछ हिस्सों में इसकी एंट्री इससे पहले भी हो सकती है, जबकि पूरे प्रदेश में सक्रिय होने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश में मानसून पूर्वी इलाकों से प्रवेश करेगा। पूर्वी यूपी में 15 से 20 जून और पश्चिमी यूपी में 20 से 25 जून के बीच मानसून पहुंचने की संभावना है।

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल राजधानी में प्री-मानसून गतिविधियां देखने को मिलेंगी। गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश के दौर शुरू हो सकते हैं, लेकिन मानसून के पूरी तरह पहुंचने में अभी समय लगेगा।

केरल में भारी बारिश का अलर्ट

मानसून की एंट्री के साथ ही केरल के कई जिलों में तेज बारिश शुरू हो गई है। IMD ने 4 से 9 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ इलाकों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका

मौसम विभाग ने जून से सितंबर तक के मानसून सीजन के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो की स्थिति बनने से बारिश प्रभावित हो सकती है। इसका असर कृषि और खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ सकता है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

क्या है मानसून घोषित करने का पैमाना?

केरल में होने वाली हर बारिश को मानसून नहीं माना जाता। मौसम विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार, राज्य के मौसम केंद्रों के कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सों में लगातार दो दिनों तक 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होनी चाहिए। इसके साथ हवा की दिशा और बादलों की स्थिति जैसे अन्य वैज्ञानिक मानकों का पूरा होना भी जरूरी होता है। इन्हीं मानकों के आधार पर इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा की गई है।