दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान एक नया कदम उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को खुद बीमा (Insurance) देने की योजना पर काम कर रहा है। इस नई व्यवस्था को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक आर्थिक कदम नहीं, बल्कि होर्मुज क्षेत्र में ईरान की बढ़ती पकड़ और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने “Hormuz Safe” नाम से एक समुद्री बीमा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री इलाकों से गुजरने वाले जहाजों और कार्गो को बीमा सुरक्षा देने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस योजना के तहत जहाज मालिकों को डिजिटल बीमा प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे और भुगतान के लिए बिटकॉइन (Bitcoin) जैसी क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल संभव होगा।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान लगातार होर्मुज क्षेत्र में अपने प्रभाव को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से जुड़े अधिकारियों ने होर्मुज क्षेत्र की अपनी परिभाषा को पहले से कहीं ज्यादा बड़ा बताते हुए इसे “विस्तृत ऑपरेशनल ज़ोन” कहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान अब इस समुद्री मार्ग को केवल एक संकरी जलधारा नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक नियंत्रण क्षेत्र के रूप में देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों को बीमा देने की योजना सिर्फ सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे ईरान समुद्री व्यापार पर आर्थिक नियंत्रण भी मजबूत कर सकता है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस मॉडल से ईरान को भविष्य में अरबों डॉलर का राजस्व मिल सकता है। अनुमान है कि यदि यह योजना बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो ईरान को 10 अरब डॉलर से अधिक की आय हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि ईरान की इस नई योजना को कई देश और समुद्री व्यापार से जुड़ी कंपनियां बेहद गंभीरता से देख रही हैं।
वैश्विक चिंता की एक बड़ी वजह यह भी है कि बीमा किसी भी समुद्री व्यापार का अहम हिस्सा होता है। यदि जहाजों को ईरान समर्थित बीमा लेने के लिए बाध्य किया जाता है या अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां जोखिम के कारण पीछे हटती हैं, तो इससे समुद्री व्यापार की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान पहले ही होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (Toll/Fee) लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है। ऐसे में बीमा योजना को उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए ईरान समुद्री मार्ग के संचालन में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस तरह की व्यवस्थाओं को लेकर कानूनी बहस भी शुरू हो सकती है।
दूसरी ओर, कई समुद्री और ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आयात करने वाले देशों, खासकर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, इसलिए वहां किसी भी बाधा का असर ईंधन कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
फिलहाल ईरान की इस नई बीमा योजना को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस व्यवस्था को स्वीकार करती हैं या फिर यह कदम नए भू-राजनीतिक विवाद की वजह बनता है।
