देशभर में इस समय भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे मौसम में हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ ते हैं। अस्पतालों में चक्कर आने, बेहोशी, तेज सिरदर्द और शरीर का तापमान बढ़ने जैसी शिकायतों वाले मरीज लगातार पहुंच रहे हैं।

गर्मी के कारण जब किसी की तबीयत बिगड़ती है तो ज्यादातर लोग इसे सामान्य बुखार समझ लेते हैं। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के तुरंत पैरासिटामोल खा लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हीट स्ट्रोक में यह दवा फायदा नहीं करती। उल्टा सही इलाज में देरी होने से मरीज की हालत ज्यादा खराब कर सकती है।


इसी चीज से बच ने के लिये हमें जानना होगा के क्या होता है हीट स्ट्रोक?

डॉक्टरों के मुताबिक, हीट स्ट्रोक गर्मी से जुड़ी सबसे गंभीर स्थिति मानी जाती है। यह तब होता है जब शरीर लंबे समय तक तेज धूप या बहुत ज्यादा गर्म माहौल में रहता है और खुद को ठंडा नहीं कर पाता है।

हमारा शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है, लेकिन जब गर्मी बहुत ज्यादा हो जाती है तो शरीर का यह सिस्टम ठीक से काम नहीं करता। ऐसे में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है।

इस दौरान व्यक्ति को तेज सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और बेहोशी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कुछ मामलों में मरीज की मानसिक स्थिति भी बिगड़ सकती है और वह उल्टी-सीधी बातें करने लगता है।


अब समझ ते है के हीट स्ट्रोक में क्यों काम नहीं करती है पैरासिटामोल?

डॉक्टर बताते हैं कि पैरासिटामोल सामान्य बुखार के लिए इस्तेमाल की जाती है। जब शरीर में किसी वायरस, संक्रमण या सूजन की वजह से तापमान बढ़ता है, तब यह दवा असर करती है। लेकिन हीट स्ट्रोक में मामला अलग होता है। इसमें शरीर का तापमान किसी संक्रमण की वजह से नहीं बल्कि बाहरी गर्मी की वजह से बढ़ता है। यानी शरीर अंदर से बीमार नहीं होता, बल्कि बाहर का तापमान शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है।

ऐसी स्थिति में पैरासिटामोल शरीर को ठंडा नहीं कर पाती। इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि हीट स्ट्रोक में इस दवा पर भरोसा करना बड़ी गलती हो सकती है। मरीज को सबसे पहले तुरंत ठंडा करना जरूरी होता है।


डॉक्टरों ने बताई सबसे बड़ी गलती

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या लोगों की लापरवाही है। कई लोग गर्मी में तबीयत खराब होने पर घर में ही इलाज शुरू कर देते हैं। किसी को बुखार जैसा महसूस होता है तो तुरंत पैरासिटामोल दे दी जाती है।


हीट स्ट्रोक होने पर क्या करना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को तेज गर्मी के बीच अचानक चक्कर आने लगें, कमजोरी महसूस हो या वह बेहोश हो जाए तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए।

सबसे पहले मरीज को धूप से हटाकर किसी ठंडी जगह पर ले जाएं। अगर कमरा हो तो पंखा, कूलर या एसी चलाएं। शरीर पर ठंडा पानी डालें या गीला कपड़ा रखें। इससे शरीर का तापमान कम करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि मरीज को धीरे-धीरे पानी या ओआरएस पिलाना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी पूरी हो सके। लेकिन अगर मरीज बेहोश हो या ठीक से पानी न पी पा रहा हो तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।


किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है हीट स्ट्रोक से ?

डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और लंबे समय तक बाहर काम करने वाले लोग शामिल हैं।

रिक्शा चालक, मजदूर, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और डिलीवरी का काम करने वाले लोग घंटों धूप में रहते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत होती है।

इसके अलावा जिन लोगों को पहले से दिल, शुगर या ब्लड प्रेशर की बीमारी है, उन्हें भी गर्मी में ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।


हीट स्ट्रोक से कैसे बचें?

डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सावधानी से हीट स्ट्रोक से बचा जा सकता है। कोशिश करें कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच ज्यादा देर तक धूप में न रहें।

घर से बाहर निकलते समय सिर को कपड़े या टोपी से ढकें। हल्के रंग और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें। नींबू पानी, छाछ और ओआरएस जैसी चीजें भी शरीर को ठंडा रखने में मदद करती हैं।


लापरवाही पड़ सकती है भारी

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। कई लोग शुरुआत में लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और अस्पताल पहुंचने में देर कर देते हैं। यही देरी कई बार बड़ी परेशानी बन जाती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर किसी व्यक्ति की हालत गर्मी में अचानक बिगड़ती दिखे तो उसे सामान्य बुखार समझने की गलती न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के बजाय तुरंत सही इलाज करवाना जरूरी है। भीषण गर्मी के इस दौर में जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। छोटी सी समझदारी किसी की जान बचा सकती है।