टेट्रा पैक में बिक रही शराब को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों से जवाब मांगा है। PIL में दावा किया गया है कि कई जगहों पर शराब को ऐसे पैक में बेचा जा रहा है, जिस पर फलों की तस्वीरें लगी होती हैं और देखने में वह किसी फ्रूट जूस या एनर्जी ड्रिंक जैसी लगती है। साथ ही पैकेजिंग पर स्वास्थ्य चेतावनी भी साफ तौर पर नहीं दिखाई देती, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
यह PIL ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ नाम की संस्था ने दाखिल की है। संस्था का कहना है कि शराब की पैकेजिंग और बॉटलिंग से जुड़े नियमों में स्पष्टता नहीं होने का फायदा उठाया जा रहा है। आरोप है कि टेट्रा पैक का इस्तेमाल करके शराब को आम पेय पदार्थ जैसा दिखाया जा रहा है, जिससे बच्चों और युवाओं तक इसकी पहुंच आसान हो सकती है।
PIL में कोर्ट से मांग की गई है कि ऐसे टेट्रा पैक शराब उत्पादों पर तुरंत रोक लगाई जाए। संस्था का तर्क है कि अगर पैकिंग पर फलों की तस्वीरें और आकर्षक डिजाइन होंगे तो लोग, खासकर कम उम्र के बच्चे, इसे सामान्य ड्रिंक समझ सकते हैं। इससे शराब के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में बिक रही देसी शराब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हुई थी। उस समय कोर्ट ने सीधे दखल देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखने की सलाह दी थी। PIL में कहा गया था कि इस तरह की पैकिंग के कारण शराब आसानी से स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों तक पहुंच रही है।
हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नई एक्साइज पॉलिसी का बचाव करते हुए कहा था कि पहले देसी शराब कांच की बोतलों में बिकती थी, लेकिन अब टेट्रा पैक का इस्तेमाल सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक इससे मिलावट रोकने और पैकिंग को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिलती है।
अब सुप्रीम Court ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि शराब की पैकेजिंग को लेकर नए दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे या नहीं। फिलहाल यह मामला सिर्फ पैकिंग का नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, बच्चों की सुरक्षा और शराब की आसान उपलब्धता से जुड़ी बड़ी बहस बनता जा रहा है।
