
पटना, 25 अप्रैल। बिहार विधानसभा में विश्वास मत (फ्लोर टेस्ट) सफल होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गई है. इसी बीच शनिवार को राज्य की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की. इस मुलाकात में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद रहे. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह नीतीश कुमार की पहली औपचारिक मुलाकात बताई जा रही है. हालांकि इसे शिष्टाचार भेंट कहा गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है.
मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात में नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और ललन सिंह के बीच लगभग 20 मिनट तक बातचीत चली. आधिकारिक तौर पर इसे सामान्य शिष्टाचार बताया गया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस दौरान नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं और उसकी रूपरेखा पर भी चर्चा हुई. एनडीए के 202 सीटों के मजबूत बहुमत के बाद अब सहयोगी दलों के बीच विभागों के वितरण और नए मंत्रियों के चयन को लेकर अंतिम चरण की बातचीत चल रही है.
इससे पहले नीतीश कुमार सुबह उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव के आवास पर भी पहुंचे थे. वे जदयू के वरिष्ठ नेताओं में से एक माने जाते हैं और वर्तमान में डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. एक ही दिन में डिप्टी सीएम और फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि सरकार के ढांचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और इसमें सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर संभावनाएं भी तेज हैं. चर्चा है कि भाजपा कोटे से कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि जदयू अपने अनुभवी नेताओं को फिर से शामिल कर सकती है. वहीं चिराग पासवान की पार्टी (LJP-RV) और जीतन राम मांझी की पार्टी (HAM) को भी उनके प्रदर्शन के आधार पर उचित हिस्सेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है. इस पूरी प्रक्रिया में आगामी लोकसभा चुनाव 2029 की रणनीति की झलक भी देखने को मिल सकती है.
हालांकि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद पर नहीं हैं, लेकिन एनडीए के भीतर उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि उनका राजनीतिक प्रभाव अभी भी मजबूत है. वे गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और केंद्र व राज्य के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में देखे जा रहे हैं.
नई सरकार का फोकस अब विकास कार्यों पर भी रहने वाला है. संकेत हैं कि कैबिनेट विस्तार के बाद रोजगार, कानून व्यवस्था और लंबित विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. उम्मीद है कि मंत्रिमंडल की पहली औपचारिक बैठक में कुछ बड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है.
