उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में आयोजित राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता इस बार सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं रही। तीन बार की ओलंपियन और विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता विनेश भोगाट की वापसी ने इसे भारतीय कुश्ती के सबसे विवादित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाक्रमों में बदल दिया। करीब डेढ़ साल पहले जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों में शामिल रहीं विनेश अब उसी व्यवस्था के बीच वापसी की कोशिश कर रही हैं, जिसके खिलाफ उन्होंने खुलकर संघर्ष किया था। लेकिन गोंडा पहुंचने के बाद उनकी वापसी की शुरुआत अखाड़े से नहीं, बल्कि विवाद से हुई।



गोंडा पहुंचीं, लेकिन अखाड़े तक नहीं पहुंच सकीं

सोमवार दोपहर जब विनेश अपने पति सोमवीर राठी, निजी सुरक्षा कर्मियों और समर्थकों के साथ नंदिनी नगर महाविद्यालय के बंद हॉल में पहुंचीं, तब माहौल पहले से तनावपूर्ण था। यह वही इलाका माना जाता है जहां बृज भूषण शरण सिंह का मजबूत प्रभाव रहा है। विनेश का दावा है कि उन्हें प्रतियोगिता स्थल के अंदर प्रवेश और शारीरिक सत्यापन की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अभ्यास के लिए हॉल इस्तेमाल करने से भी रोका गया। एक वीडियो में उन्हें निराशा भरे स्वर में कहते सुना गया- “कम से कम ताला तो खुलवा दो… क्या अब अभ्यास भी नहीं कर सकती?” प्रतियोगिता स्थल के बाहर मीडिया से बात करते हुए विनेश ने कहा, “क्या चाह रहे हैं वो? मैं हार मान लूं? संन्यास ले लूं? ताकि उनकी साजिश सफल हो जाए? मैं सिर्फ निष्पक्ष मौका मांग रही हूं, लेकिन मुझे खेलने नहीं दिया जा रहा।”



वापसी या राजनीतिक टकराव?

विनेश फोगाट ने इस प्रतियोगिता को लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी की शुरुआत के तौर पर चुना था। लेकिन उनकी वापसी को लेकर विवाद सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा। सामाजिक माध्यमों और खेल जगत में लगातार यह सवाल उठता रहा कि क्या उनकी वापसी “राजनीतिक” है। इस पर विनेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मुझे ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ कहा जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि फिर आप कौन हैं? मैंने भारतीय कुश्ती को 20 साल दिए हैं। खिलाड़ी मानसिक दबाव में हैं। मुझे इस माहौल में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा।” उनका यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं माना जा रहा, बल्कि भारतीय कुश्ती में लंबे समय से चल रहे शक्ति संघर्ष की तरफ भी इशारा माना जा रहा है।



भारतीय कुश्ती महासंघ का रुख: “निलंबन खत्म नहीं हुआ”

दूसरी तरफ Wrestling Federation of India ने अपना रुख स्पष्ट रखा। महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि विनेश के खिलाफ पांच बिंदुओं पर नोटिस जारी किया गया है और जब तक वह जवाब नहीं देतीं, तब तक उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। महासंघ के अनुसार उनका निलंबन 26 जून 2026 तक प्रभावी है। हालांकि विनेश का दावा है कि उन्होंने विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की सभी वापसी प्रक्रियाओं का पालन किया है। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का कथित ईमेल भी साझा किया, जिसमें कहा गया था कि वह 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिता में वापसी के लिए पात्र हैं। विनेश के मुताबिक, “अगर मैंने कोई नियम तोड़ा होता तो राष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी या विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी मुझे नोटिस देती। मैंने सिर्फ एक स्थान संबंधी जानकारी अपडेट करना भूल गई थी। उस समय मैं मां बनी थी और विधानसभा सत्र में भी थी। मैंने माफी मांगी और मुझे क्लीन चिट दी गई।”



भारतीय कुश्ती का गहराता संकट

गोंडा विवाद अब सिर्फ एक खिलाड़ी और महासंघ के बीच टकराव नहीं माना जा रहा। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारतीय कुश्ती में प्रशासन, राजनीति और खिलाड़ियों के बीच बढ़ती दूरी की बड़ी तस्वीर पेश करता है। जंतर-मंतर आंदोलन के बाद से भारतीय कुश्ती लगातार विवादों में रही है। खिलाड़ियों और महासंघ के बीच भरोसे का संकट गहराया है और अब विनेश की वापसी को लेकर हुआ टकराव उसी तनाव का नया अध्याय माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी खिलाड़ी की वापसी का फैसला यदि अखाड़े से ज्यादा प्रशासनिक विवादों में उलझ जाए, तो उसका असर केवल एक करियर पर नहीं बल्कि पूरे खेल तंत्र की छवि पर पड़ता है।


“हम लड़ेंगे…”

गोंडा में पूरे दिन चले विवाद के बाद विनेश देर शाम लखनऊ से दिल्ली रवाना हो गईं। लेकिन जाते-जाते उन्होंने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “मैं ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं। भगवान जानता है कि मैं साफ हूं। अगर मैं सही हूं तो मुझे ताकत मिलेगी। हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।”