केरल के मलप्पुरम ज़िले की थवन्नूर विधानसभा सीट पर इस बार के चुनाव नतीजे कई लोगों के लिए चौंकाने वाले रहे हैं। मुस्लिम बहुल माने जाने वाले इस क्षेत्र में कांग्रेस के ईसाई उम्मीदवार वी. एस. जॉय ने जीत की ओर मज़बूत बढ़त बना ली है एक ऐसा नतीजा जिसकी कल्पना राजनीतिक विश्लेषक भी कम ही करते थे।

थवन्नूर में मुस्लिम आबादी 54%, जबकि ईसाई मतदाता सिर्फ़ 1.4% हैं। इसके बावजूद जॉय अपने प्रतिद्वंदी और पूर्व मंत्री के. टी. जलील (स्वतंत्र) को पीछे छोड़ते दिखाई दे रहे हैं। अगर उनकी यह बढ़त जीत में बदलती है, तो यह पहली बार होगा जब मलप्पुरम की किसी मुस्लिम-बहुल सीट पर एक ईसाई उम्मीदवार विजेता बनेगा।


इस जीत के पीछे क्या है?

कांग्रेस की इस सफलता में उसके सहयोगी IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। IUML ने जॉय को खुलकर समर्थन दिया, खासकर इसलिए क्योंकि जलील लंबे समय से IUML नेतृत्व के आलोचक रहे हैं।

जॉय की IUML नेतृत्व से अच्छी समझ-बूझ ने उन्हें मुस्लिम वोटरों के बीच स्वीकार्य बनाया जो इस पूरे उलटफेर का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।


राजनीतिक महत्व क्यों ज़्यादा है?

मलप्पुरम आमतौर पर मुस्लिम बहुल वोट पैटर्न के लिए जाना जाता है। यहां से किसी ईसाई उम्मीदवार की जीत

सामाजिक तौर पर राजनीतिक समीकरणों के लिहाज़ से और कांग्रेस–IUML गठबंधन की रणनीति के संदर्भ में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।जलील ने भी फेसबुक पोस्ट में अपनी हार स्वीकारी और जॉय को बधाई दी।उन्होंने लिखा मैं जनता के आदेश को स्वीकार करता हूँ।


एक ऐतिहासिक जीत की ओर…

अभी अंतिम परिणाम आने बाक़ी हैं, लेकिन रुझानों ने साफ़ कर दिया है कि थवन्नूर में राजनीतिक इतिहास बदल चुका है जहां समुदाय-आधारित वोटिंग की पारंपरिक धारणाओं को इस चुनाव ने चुनौती दी है।