सौरभ राय, मऊ: भले ही मुख्तार अंसारी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मऊ की राजनीति में आज भी अंसारी परिवार का प्रभाव साफ दिखाई देता है। सोमवार को जिले की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक अब्बास अंसारी लंबे समय बाद अपने विधानसभा क्षेत्र मऊ सदर पहुंचे। खास बात यह रही कि इस दौरान वे अपनी पार्टी के कार्यालय जाने के बजाय सीधे समाजवादी पार्टी के दफ्तर पहुंच गए।
अचानक सपा कार्यालय पहुंचे अब्बास अंसारी का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान अब्बास कार्यकर्ताओं के साथ काफी सहज नजर आए और सपा कार्यालय में बातचीत के दौरान ठहाके लगाते भी दिखाई दिए। उनके इस कदम के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं कि कहीं अब्बास अंसारी भविष्य में समाजवादी पार्टी का दामन थामने की तैयारी तो नहीं कर रहे हैं।
पिता मुख्तार अंसारी की राजनीतिक विरासत संभाल रहे अब्बास
दिवंगत विधायक मुख्तार अंसारी के जेल जाने के बाद मऊ सदर विधानसभा सीट की राजनीतिक जिम्मेदारी उनके बेटे अब्बास अंसारी को सौंपी गई थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और सुभासपा के गठबंधन के तहत अब्बास अंसारी ने ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के टिकट पर भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में अब्बास अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार अशोक सिंह को 44 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। हालांकि इसके बाद हेट स्पीच और अन्य मामलों में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो गई। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी विधानसभा सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा और मऊ में उपचुनाव की चर्चाएं शुरू हो गईं। बाद में कानूनी मामलों में राहत मिलने के बाद उनकी सदस्यता बरकरार रही।
ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब्बास अंसारी का सपा कार्यालय पहुंचना और वहां कार्यकर्ताओं के साथ सहज अंदाज में नजर आना राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने लगाए अलग-अलग मायने
राजनीतिक विश्लेषकों और चुनावी रणनीतिकारों का कहना है कि अंसारी परिवार के रिश्ते भाजपा को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख दलों से बेहतर रहे हैं। ऐसे में अब्बास अंसारी का समाजवादी पार्टी कार्यालय जाना कोई सामान्य राजनीतिक संकेत नहीं माना जा रहा विश्लेषकों के मुताबिक, पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ जैसे जिलों में अंसारी परिवार का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है। अब्बास अंसारी ने अपने पिता के जेल में रहने के बावजूद मऊ सदर सीट पर जीत हासिल कर यह साबित किया था कि परिवार का जनाधार अब भी मजबूत है।
ओमप्रकाश राजभर के लिए बढ़ सकती है चुनौती
हालांकि अब्बास अंसारी ने इस दौरान सिर्फ सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात की और मीडिया से दूरी बनाए रखी, लेकिन उनकी मौजूदगी ने कई राजनीतिक संकेत जरूर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भविष्य में अब्बास अंसारी समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं, तो यह सीट ओमप्रकाश राजभर के लिए चुनौती बन सकती है। लंबे अंतराल के बाद भी समर्थकों के बीच अब्बास अंसारी की लोकप्रियता और बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए मऊ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है.
