
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति तेज हो गई है। इन सीटों के जरिए कई बड़े नेताओं और नए चेहरों की राजनीतिक एंट्री की चर्चा हो रही है। खास तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि दोनों को विधान परिषद भेजा जा सकता है, ताकि वे सरकार में मंत्री बने रह सकें।
जानकारी के अनुसार, विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से 9 सीटें 28 जून 2026 को खाली हो रही हैं, जबकि एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है। यह सीट तब खाली हुई थी जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता छोड़कर राज्यसभा का रास्ता चुना था।
इन 10 सीटों में सबसे ज्यादा 5 सीटें जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू के पास हैं। जेडीयू की जिन सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें नीतीश कुमार, गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा और भगवान सिंह कुशवाहा का नाम शामिल है। हालांकि भगवान सिंह कुशवाहा बाद में जगदीशपुर से विधायक चुने गए और उन्हें बिहार सरकार में मंत्री भी बनाया गया।
इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी की 2 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें एक सीट मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की थी। सम्राट चौधरी ने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में तारापुर सीट से जीत हासिल की थी, जिसके बाद उनकी विधान परिषद सदस्यता समाप्त हो गई। वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता संजय मयूख का कार्यकाल भी 28 जून को खत्म हो रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी की भी दो सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें मोहम्मद फारूक और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं। कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी इसी तारीख को खत्म हो रहा है।
बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। विधान परिषद के एक सदस्य को चुनने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। वर्तमान संख्या बल के हिसाब से राष्ट्रीय जनता दल के पास 25 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि महागठबंधन के सहयोगियों के समर्थन से वह कम से कम एक सीट जीत सकती है।
वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। एनडीए के पास इस समय 202 विधायकों का समर्थन है। संख्या बल के आधार पर एनडीए आसानी से 9 सीटें जीत सकता है। अब गठबंधन के नेता 10वीं सीट जीतकर पूरी तरह क्लीन स्वीप करने की रणनीति बना रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव के जरिए कई नए नेताओं को विधान परिषद भेजा जा सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार और दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है। दोनों फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार, किसी भी मंत्री को एक निश्चित समय के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। ऐसे में दोनों नेताओं को विधान परिषद भेजे जाने की संभावना काफी बढ़ गई है।
अगर निशांत कुमार और दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य चुने जाते हैं, तो वे औपचारिक रूप से बिहार विधानमंडल का हिस्सा बन जाएंगे। इसके बाद उनका मंत्री पद भी सुरक्षित हो जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव और नई पीढ़ी की एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है।
