पटना:
बिहार से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़का और लड़की को कथित तौर पर साथ बैठकर बात करते और रोमांस करते देख गांव वालों ने उन्हें तालिबानी सजा दे दी। दोनों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, उनका सिर मुंडवाया गया और बाद में जबरन शादी भी करा दी गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना बिहार के एक ग्रामीण इलाके की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप था कि दोनों नाबालिग आपस में प्रेम संबंध में थे और गांव के एक सुनसान इलाके में मिले थे। इसके बाद कुछ लोगों ने दोनों को पकड़ लिया और पंचायत जैसी बैठक बुला ली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गांव में मौजूद लोगों ने दोनों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। लड़के और लड़की का सिर मुंडवा दिया गया और उन्हें पूरे गांव के सामने बैठाया गया। इतना ही नहीं, बाद में दोनों की जबरन शादी भी करा दी गई। वायरल वीडियो में कुछ लोग दोनों को घेरकर खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि आसपास मौजूद लोग इस घटना का वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं।
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई यूजर्स ने इसे कानून और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया है। लोगों का कहना है कि किसी को भी इस तरह सजा देने का अधिकार नहीं है, खासकर तब जब मामला नाबालिगों से जुड़ा हो।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर दोनों नाबालिग हैं तो जबरन शादी कराना बाल विवाह निषेध कानून के तहत अपराध माना जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, सिर मुंडवाना और दबाव बनाना भी गंभीर कानूनी मामला बन सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और मामले की जांच की जा रही है। संबंधित लोगों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस मामले में कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने भी घटना की निंदा की है। उनका कहना है कि आज भी कई ग्रामीण इलाकों में सामाजिक दबाव और तथाकथित पंचायतें कानून से ऊपर खुद को समझती हैं, जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान बढ़ाने की जरूरत है। किसी भी विवाद या सामाजिक मामले का फैसला कानून के दायरे में होना चाहिए, न कि भीड़ या पंचायत के दबाव में।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर कब तक समाज के नाम पर लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं, को इस तरह सार्वजनिक अपमान और जबरन फैसलों का सामना करना पड़ेगा।
