केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कोझिकोड जिले की पेराम्ब्रा सीट से यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की उम्मीदवार फातिमा थाहिलिया ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के वरिष्ठ नेता टी.पी. रामकृष्णन को 5,087 वोटों से हराया। फातिमा थाहिलिया को कुल 81,429 वोट मिले, जबकि रामकृष्णन को 76,342 वोट प्राप्त हुए।

इस जीत के साथ फातिमा थाहिलिया इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की पहली महिला विधायक (MLA) बन गई हैं। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पेराम्ब्रा सीट पर कई सालों से LDF का कब्जा रहा था। 1980 के बाद से इस सीट पर लगातार वामपंथी उम्मीदवार जीतते आ रहे थे।

इस चुनाव में कई ऐसे कारण रहे, जिन्होंने फातिमा थाहिलिया की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे पहले, उनके चुनाव प्रचार की रणनीति काफी मजबूत रही। उन्होंने सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया और खासकर युवा वर्ग (Gen Z) को अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने क्षेत्र में विकास की कमी का मुद्दा उठाया और लोगों से बदलाव की अपील की।

दूसरी ओर, LDF की ओर से चुनाव प्रचार के दौरान कुछ विवाद भी सामने आए। एक बयान में यह आरोप लगाया गया कि फातिमा थाहिलिया का संबंध एक धार्मिक संगठन से है। इसके बाद LDF के प्रचार में कुछ सांप्रदायिक रंग देखने को मिला। हालांकि, इस रणनीति का उल्टा असर हुआ और UDF ने इसे मुद्दा बनाकर जनता के सामने पेश किया कि LDF चुनाव को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा, राज्य सरकार के खिलाफ कुछ हद तक एंटी-इंकंबेंसी (सरकार के खिलाफ नाराजगी) भी देखी गई। लोगों में बदलाव की भावना थी, जिसका फायदा फातिमा थाहिलिया को मिला। उन्होंने अलग-अलग समुदायों से संपर्क किया और उनका समर्थन हासिल करने में सफल रहीं।

स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे भी इस जीत में अहम रहे। पहले पेराम्ब्रा क्षेत्र की ज्यादातर पंचायतों पर LDF का कब्जा था, लेकिन हाल के चुनावों में UDF ने कई पंचायतों में जीत दर्ज की। इससे यह साफ संकेत मिला कि जनता का रुझान बदल रहा है।

टी.पी. रामकृष्णन एक अनुभवी नेता हैं और उन्होंने पहले भी इस सीट से बड़ी जीत हासिल की थी। 2021 के चुनाव में उन्होंने करीब 22,500 वोटों से जीत दर्ज की थी। हालांकि, इस बार परिस्थितियां अलग थीं और उनकी लोकप्रियता भी उन्हें जीत नहीं दिला सकी।