दय्यान खान

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए भारत सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा बचत बेहद जरूरी हो गई है।

सरकार ने लोगों से क्या अपील की?

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया है। सरकार चाहती है कि लोग जहां तक संभव हो निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। मंत्रालय ने मेट्रो, बस और रेलवे जैसी सेवाओं को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। इसके अलावा कारपूलिंग अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि अगर आम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी ऊर्जा बचत की आदतें अपनाते हैं तो इससे देश पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी बन चुका है।

क्या देश में पेट्रोल-डीजल की कमी होने वाली है?

सरकार ने इस सवाल पर साफ तौर पर कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक भारत के पास पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का भंडार मौजूद है और सभी रिफाइनरियां सामान्य तरीके से काम कर रही हैं।

सरकार ने जानकारी दी कि देश के किसी भी हिस्से में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी की स्थिति नहीं है। वहीं घरेलू गैस एजेंसियों पर भी एलपीजी की सप्लाई लगातार जारी है। मंत्रालय का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे।

सरकार ने बताया कितना है तेल और गैस का स्टॉक

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। सरकार ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग देश है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है।

इसके अलावा सरकार ने उर्वरक सप्लाई को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया है। मंत्रालय के अनुसार खरीफ 2026 सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। कुल जरूरत के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक पहले से मौजूद है, जिससे किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

एलपीजी सिलेंडर सप्लाई पर भी सरकार का बड़ा बयान

मंत्रालय ने घरेलू रसोई गैस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार पिछले तीन दिनों में 1 करोड़ 14 लाख बुकिंग के मुकाबले 1 करोड़ 26 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई है। वहीं कमर्शियल एलपीजी और ऑटो एलपीजी की सप्लाई भी सामान्य बनी हुई है।

सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए लोग घबराकर अतिरिक्त सिलेंडर या ईंधन स्टॉक करने की कोशिश न करें, क्योंकि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य तरीके से काम कर रही है।

आखिर सरकार की चिंता क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर और ज्यादा दिखाई दे सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

यही वजह है कि सरकार अभी से ऊर्जा बचत पर जोर दे रही है। मंत्रालय का कहना है कि अगर लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन अपनाएंगे तो इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी बल्कि विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।

लोगों से शांति बनाए रखने की अपील

सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और आम लोगों को किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लिए जाएंगे ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।