
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति के गलियारों में भूकंप ला दिया है। राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट कोलाथुर पर वह हुआ जिसकी कल्पना कट्टर समर्थकों ने भी नहीं की थी। मुख्यमंत्री और DMK सुप्रीमो एम. के. स्टालिन को अपनी ही सुरक्षित सीट पर करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने स्टालिन को लगभग 9,000 वोटों के अंतर से हराकर 'जायंट किलर' का खिताब अपने नाम कर लिया है।
चुनावी आंकड़े और कड़ा मुकाबला
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कोलाथुर सीट पर सुबह से ही वोटों की गिनती के दौरान कांटे की टक्कर देखी गई। अंतिम दौर की गिनती पूरी होने तक TVK के वी.एस. बाबू को कुल 82,109 वोट मिले, जबकि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन 72,988 वोटों पर ही सिमट गए। AIADMK के उम्मीदवार आर. संथानकृष्णन लगभग 14,000 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। यह 2011 के बाद पहला मौका है जब कोलाथुर की जनता ने स्टालिन के बजाय किसी अन्य चेहरे पर भरोसा जताया है।
कौन हैं वी.एस. बाबू जिन्होंने ढहाया स्टालिन का किला
स्टालिन को धूल चटाने वाले वी.एस. बाबू कभी DMK के ही वफादार सिपाही और स्टालिन के बेहद करीबी माने जाते थे। वे उत्तर चेन्नई के जिला सचिव रह चुके हैं और क्षेत्र की रग-रग से वाकिफ हैं। चुनाव से ठीक पहले विजय की पार्टी TVK में शामिल होकर उन्होंने न केवल अपनी जमीन मजबूत की, बल्कि मुख्यमंत्री के खिलाफ स्थानीय नाराजगी को वोटों में तब्दील कर दिया। उनकी यह जीत तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग के उदय का संकेत दे रही है।
विजय फैक्टर और सत्ता विरोधी लहर का प्रभाव
इस हार के पीछे अभिनेता विजय की राजनीतिक एंट्री को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। विजय की पार्टी ने युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को अपनी ओर खींचकर DMK के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा दी। इसके साथ ही, पिछले पांच सालों के दौरान बिजली की बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार के आरोपों और कानून-व्यवस्था के मुद्दों ने शहरी मतदाताओं को DMK से दूर कर दिया। कोलाथुर में पट्टा आवंटन और जलभराव जैसी स्थानीय समस्याओं का समाधान न होना भी स्टालिन पर भारी पड़ा।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई शर्मनाक हार
एम.के. स्टालिन तमिलनाडु के इतिहास में चुनाव हारने वाले चौथे मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए हैं। 2021 के चुनाव में 70,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीतने वाले स्टालिन के लिए 2026 की यह हार उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। कोलाथुर की इस हार ने न केवल स्टालिन की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि पूरे तमिलनाडु में DMK के प्रभुत्व को भी चुनौती दे दी है।
