दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद से आई एक खबर ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। डूंडाहेड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नमूनों में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV-1) मिलने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। हालांकि अभी तक किसी बच्चे में पोलियो संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सीवेज में वायरस की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि वायरस किसी स्तर पर समुदाय में घूम रहा हो सकता है।

सीवेज में वायरस मिलने का क्या मतलब है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज सर्विलांस किसी भी वायरस की ‘साइलेंट एंट्री’ पकड़ने का एक प्रभावी तरीका है। कई बार वायरस लोगों के शरीर में मौजूद होता है लेकिन लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के मल के जरिए वायरस सीवेज तक पहुंच सकता है। इसलिए सीवेज में पोलियो वायरस मिलना सीधे तौर पर बीमारी फैलने का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए चेतावनी जरूर है।

कितनी खतरनाक है यह स्थिति?

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि जिले में किसी भी बच्चे में पोलियो के लक्षण नहीं पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है तथा पांच साल से कम उम्र के बच्चों की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन बच्चों का नियमित टीकाकरण पूरा है, उनके लिए खतरा बेहद कम रहता है। असली जोखिम उन क्षेत्रों में होता है जहां वैक्सीनेशन कवरेज कमजोर हो।

स्वास्थ्य विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?

वायरस मिलने के बाद 12 शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के तहत विशेष सर्वे अभियान शुरू किया गया है। 100 से अधिक टीमें घर-घर जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए। करीब 1.25 लाख आबादी को निगरानी दायरे में लिया गया है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

देश के लिए क्यों अहम है यह अलर्ट?

भारत को वर्षों पहले पोलियो-मुक्त घोषित किया जा चुका है, इसलिए ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। गाजियाबाद में मिला वायरस इस बात की याद दिलाता है कि पोलियो के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित टीकाकरण और सतर्क निगरानी ही इस बीमारी को दोबारा सिर उठाने से रोक सकती है।