दुनियाभर में ऐसे लाखों दंपति हैं जो लंबे समय तक संतान सुख के लिए संघर्ष करते हैं। कई मामलों में समस्या पुरुषों में पाई जाती है, जहां शरीर में स्पर्म की संख्या बेहद कम होती है या जांच में बिल्कुल भी स्पर्म नहीं मिलते। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से विकसित नई तकनीक ने ऐसे पुरुषों के लिए उम्मीद की नई राह खोल दी है।


कोलंबिया यूनिवर्सिटी की तकनीक चर्चा में

अमेरिका की Columbia University में विकसित इस नई तकनीक ने उन पुरुषों में भी स्पर्म खोजने में सफलता हासिल की है, जिन्हें पहले डॉक्टर पिता बनने की संभावना लगभग खत्म बता चुके थे।

यह तकनीक मशीन लर्निंग और हाई-टेक इमेज एनालिसिस की मदद से काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य उन बेहद दुर्लभ स्पर्म सेल्स को पहचानना है, जो सामान्य लैब टेस्ट में दिखाई नहीं देते।


कैसे काम करती है AI आधारित यह तकनीक?

विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम हजारों माइक्रोस्कोपिक तस्वीरों को बहुत तेजी से स्कैन करता है। जहां इंसानी आंखें स्पर्म पहचानने में असफल हो जाती हैं, वहां AI सिस्टम छिपे हुए स्पर्म सेल्स को ढूंढ निकालता है।

इसके बाद रोबोटिक तकनीक की मदद से उन स्पर्म को अलग कर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि IVF या दूसरी फर्टिलिटी प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किया जा सके।


कई साल बाद मिली खुशखबरी

रिपोर्ट के मुताबिक एक दंपति लंबे समय से बच्चा पैदा करने की कोशिश कर रहा था। जांच में पता चला कि पुरुष एक जेनेटिक समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण उसके सीमन में स्पर्म नहीं मिल रहे थे।

डॉक्टरों ने प्राकृतिक रूप से पिता बनने की संभावना बेहद कम बताई थी। लेकिन AI तकनीक की मदद से नमूने में कुछ रेयर स्पर्म सेल्स खोज लिए गए। बाद में उन्हीं की मदद से गर्भधारण संभव हो पाया।


एक्सपर्ट ने क्या कहा?

रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उन मामलों में भी कारगर साबित हो रही है, जहां पहले उम्मीद लगभग खत्म मानी जाती थी। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिन पुरुषों को पूरी तरह बांझ माना गया था, उनमें करीब 30 प्रतिशत मामलों में स्पर्म खोजने में सफलता मिली है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में यह तकनीक पुरुष बांझपन के इलाज का तरीका बदल सकती है।

अभी और रिसर्च की जरूरत

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। इसके लंबे समय के परिणाम, सुरक्षा और सफलता दर को समझने के लिए बड़े स्तर पर रिसर्च जरूरी होगी।

इसके अलावा मेडिकल डेटा की गोपनीयता और AI आधारित हेल्थ सिस्टम की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर भी आगे ध्यान देना होगा।


क्यों बढ़ रही है पुरुषों में बांझपन की समस्या?

डॉक्टरों के मुताबिक कई कारण पुरुष फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं:

खराब लाइफस्टाइल

तनाव और नींद की कमी

धूम्रपान और शराब

प्रदूषण

हार्मोनल गड़बड़ी

मोटापा और गलत खानपान


भविष्य में क्या बदल सकता है?

अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो ऐसे हजारों पुरुषों के लिए पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है जिन्हें अब तक निराशा ही मिली थी। AI की मदद से न केवल स्पर्म पहचानना आसान होगा, बल्कि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सफलता दर भी बढ़ सकती है।