तकनीक ने इंसानी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतने ही नए सवाल भी खड़े किए हैं। अब एक नई बहस तेजी से सामने आ रही है क्या रिश्तों का फैसला अब इंसान नहीं, बल्कि Artificial Intelligence (AI) करने लगा है? हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों ने अपने रिश्तों, शादी, ब्रेकअप और निजी फैसलों के लिए AI चैटबॉट्स की सलाह लेना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ती निर्भरता कई रिश्तों में तनाव और दूरी की वजह बन रही है।

पहले लोग रिश्तों को लेकर दोस्तों, परिवार या काउंसलर की राय लेते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स से पूछ रहे हैं “क्या मेरा पार्टनर मेरे लिए सही है?”, “क्या मुझे रिश्ता खत्म कर देना चाहिए?” या “क्या वह मुझे धोखा दे रहा है?” AI के जवाब कई लोगों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। यही वजह है कि मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों के विशेषज्ञ इसे गंभीरता से देख रहे हैं।

हाल के कुछ मामलों में लोगों ने दावा किया कि AI चैटबॉट्स ने उन्हें अपने रिश्तों में “रेड फ्लैग” दिखाए, जिसके बाद उन्होंने पार्टनर से दूरी बना ली या रिश्ता खत्म कर दिया। कुछ लोगों का कहना है कि AI ने उन्हें भावनात्मक समर्थन दिया, जबकि दूसरी ओर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि मशीनें इंसानी भावनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को पूरी तरह समझ नहीं सकतीं।

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, AI चैटबॉट्स बड़ी मात्रा में डेटा और पैटर्न के आधार पर जवाब देते हैं, लेकिन वे इंसानी भावनाओं, पारिवारिक पृष्ठभूमि, सामाजिक परिस्थितियों और रिश्तों की गहराई को पूरी तरह नहीं समझ पाते। उदाहरण के लिए, किसी रिश्ते में आई छोटी गलतफहमी को AI “टॉक्सिक बिहेवियर” मान सकता है, जबकि असल जिंदगी में बातचीत से मामला सुलझ सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कई लोग अकेलेपन या भावनात्मक कमजोरी के समय AI पर ज्यादा भरोसा करने लगते हैं। कुछ यूजर्स AI चैटबॉट्स से घंटों बात करते हैं और धीरे-धीरे उन्हें भावनात्मक सहारा मानने लगते हैं। इससे वास्तविक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में पार्टनर को यह महसूस हुआ कि सामने वाला व्यक्ति इंसानों से ज्यादा AI से जुड़ रहा है, जिससे रिश्तों में दूरी बढ़ी।

हालांकि, AI के पक्ष में तर्क देने वाले लोग कहते हैं कि चैटबॉट्स कई बार निष्पक्ष सलाह दे सकते हैं। वे बिना जज किए किसी की बात सुनते हैं और तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। कुछ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआती भावनात्मक मदद या सामान्य सलाह के लिए AI उपयोगी हो सकता है, लेकिन जीवन बदलने वाले फैसले सिर्फ मशीन की सलाह पर नहीं लेने चाहिए।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि AI एक “टूल” है, फैसला लेने वाला इंसान होना चाहिए। चैटबॉट्स का उद्देश्य जानकारी देना या सोचने में मदद करना है, न कि रिश्तों का अंतिम निर्णय करना। अगर कोई व्यक्ति रिश्ते में गंभीर तनाव, मानसिक दबाव या हिंसा जैसी स्थिति का सामना कर रहा हो, तो उसे प्रोफेशनल काउंसलर या भरोसेमंद लोगों से बात करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग मजाक में कह रहे हैं कि “अब दिल टूटने से पहले लोग ChatGPT से परमिशन लेंगे”, जबकि कुछ इसे आधुनिक रिश्तों के लिए खतरे की घंटी बता रहे हैं।

रिश्ते भरोसे, बातचीत और समझदारी पर टिके होते हैं। AI सलाह दे सकता है, लेकिन भावनाओं को महसूस नहीं कर सकता। ऐसे में सवाल अब भी कायम है क्या इंसान अपने रिश्तों का फैसला खुद करेगा, या धीरे-धीरे यह जिम्मेदारी मशीनों को सौंप दी जाएगी?