बिहार की राजनीति में इन दिनों कई नए चेहरे तेजी से उभर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar के साथ जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है Shweta Gupta। माना जा रहा है कि बिहार में हुए बड़े कैबिनेट विस्तार में श्वेता गुप्ता पहली बार मंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। यह केवल उनके राजनीतिक करियर का बड़ा मोड़ नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
श्वेता गुप्ता जनता दल यूनाइटेड (JDU) की विधायक हैं और उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में शिवहर सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार नवनीत कुमार को लगभग 31 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। उनकी जीत इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि शिवहर क्षेत्र लंबे समय से पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों के लिए जाना जाता रहा है।
राजनीति में आने से पहले श्वेता गुप्ता मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। उपलब्ध चुनावी हलफनामे के अनुसार वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और पेशे से डॉक्टर रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी साफ-सुथरी छवि और प्रोफेशनल बैकग्राउंड ने उन्हें जनता के बीच अलग पहचान दिलाई। खास बात यह भी है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जो आज की राजनीति में अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।
श्वेता गुप्ता को जेडीयू के भीतर तेजी से उभरते चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें महिला प्रतिनिधित्व, शिक्षित नेतृत्व और नई पीढ़ी की राजनीति का प्रतीक बनाकर आगे बढ़ाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह देने का फैसला पार्टी के अंदर नए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि श्वेता गुप्ता का मंत्री बनना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि मिथिलांचल और उत्तर बिहार की राजनीति में जेडीयू की पकड़ मजबूत करने की कोशिश भी है। शिवहर जैसे इलाके से आने वाली महिला विधायक को कैबिनेट में शामिल करना महिलाओं और युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर निशांत कुमार की एंट्री को लेकर भी बिहार की राजनीति में लगातार चर्चा बनी हुई है। कुछ ही सप्ताह पहले सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले निशांत कुमार अब सीधे सत्ता के केंद्र में पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में श्वेता गुप्ता और निशांत कुमार जैसे नए चेहरों की एंट्री को बिहार की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
श्वेता गुप्ता की व्यक्तिगत संपत्ति को लेकर भी काफी चर्चा हुई है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 28.4 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि उनके ऊपर करीब 4.1 करोड़ रुपये की देनदारी भी दर्ज है।
अब सबकी नजर बिहार मंत्रिमंडल के नए चेहरों पर टिकी हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर श्वेता गुप्ता को महत्वपूर्ण विभाग मिलता है, तो वह आने वाले समय में बिहार की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हो सकती हैं। बिहार की राजनीति में उनका यह उभार आने वाले चुनावों की दिशा भी तय कर सकता है।
