तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय का तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना अब सिर्फ एक राज्य की राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि यह दक्षिण भारतीय राजनीति और सिनेमा के बदलते समीकरणों की बड़ी कहानी बनता जा रहा है। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के अप्रत्याशित प्रदर्शन के बाद अब विदेशों से भी लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उन्हें बधाई दी और अब मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की प्रतिक्रिया ने इस पूरे घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।
“ओरु वायरल पुरच्ची” ने क्यों खींचा ध्यान?
मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सामाजिक माध्यम पर विजय को बधाई देते हुए लिखा कि लोगों ने वर्षों तक उन्हें फिल्मों में भ्रष्ट नेताओं और अन्याय के खिलाफ लड़ते देखा है, लेकिन अब जनता ने उन्हें वास्तविक शासन की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने तमिल भाषा में “ओरु वायरल पुरच्ची” यानी “एक उंगली की क्रांति” लिखते हुए लोकतंत्र में वोट की ताकत को सबसे बड़ी शक्ति बताया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह बयान सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं था, बल्कि दक्षिण भारत में उभर रहे नए जननेतृत्व की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत भी था। खास बात यह रही कि यह संदेश तमिल पहचान, लोकतांत्रिक भागीदारी और जनता की राजनीतिक ताकत- तीनों को एक साथ जोड़ता दिखाई दिया।
तमिलनाडु की राजनीति में कैसे बदला समीकरण?
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे माहौल में पहली बार चुनाव लड़ रही विजय की पार्टी का 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन जाना कई राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है। हालांकि पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, वीसीके और आईयूएमएल जैसे दलों ने विजय को समर्थन दिया, जिसके बाद गठबंधन का आंकड़ा बहुमत तक पहुंच गया। यही वजह है कि कई राजनीतिक विशेषज्ञ इस चुनाव को “तमिल राजनीति के नए दौर की शुरुआत” मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह परिणाम पारंपरिक राजनीति से नाराज युवा मतदाताओं और शहरी वर्ग के मूड को भी दिखाता है।
फिल्मी नायक से जननेता तक का सफर
विशेषज्ञों के अनुसार विजय की लोकप्रियता केवल एक फिल्म स्टार होने की वजह से नहीं बढ़ी। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने शिक्षा, युवाओं की बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर लगातार बयान दिए। फिल्मों में व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाले किरदार निभाने से उनकी छवि पहले से ही “जनता के नायक” जैसी बन चुकी थी। राजनीति में आने के बाद उन्होंने उसी छवि को जनता के बीच राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश की। यही कारण रहा कि पहली बार चुनाव लड़ने के बावजूद उनकी सभाओं में भारी भीड़ देखने को मिली और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। कई विश्लेषक इसे दक्षिण भारत में सिनेमा और राजनीति के पुराने रिश्ते का नया संस्करण भी मान रहे हैं।
विदेशों में क्यों दिख रहा तमिल राजनीति का असर?
मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों में बड़ी संख्या में तमिल समुदाय रहता है और वहां तमिल भाषा, संस्कृति और सिनेमा का गहरा प्रभाव है। यही वजह है कि विजय के मुख्यमंत्री बनने की खबर इन देशों में भी चर्चा का विषय बनी। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी विजय को बधाई देते हुए तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच पुराने सांस्कृतिक, आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत होने की उम्मीद जताई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह तमिल पहचान और सांस्कृतिक प्रभाव के बड़े प्रतीक के रूप में भी उभर रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने यही होगी कि क्या वह फिल्मों में बनी “जननायक” की छवि को वास्तविक शासन और प्रशासन में भी कायम रख पाते हैं या नहीं।
