बिहार के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को एक संदिग्ध फोन कॉल मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार 5 जून को एक व्यक्ति ने उन्हें फोन कर कहा कि उनके नाम से एक पार्सल आया है और उसे रिसीव करना होगा। डिप्टी सीएम ने जब जवाब दिया कि उन्होंने कोई पार्सल नहीं मंगवाया है, तब कॉल करने वाला व्यक्ति नाराज हो गया। आरोप है कि उसने अपशब्द कहे और धमकी भी दी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री के निजी सचिव ने पटना साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और जिस मोबाइल नंबर से कॉल किया गया था, उसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
साइबर ठगी का नया तरीका होने की आशंका
पुलिस की शुरुआती जांच में यह मामला साइबर अपराध से जुड़ा लग रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से पार्सल के नाम पर लोगों को ठगने के कई मामले सामने आए हैं। ठग पहले फोन करके कहते हैं कि आपके नाम से कोई पार्सल आया है या उसमें कोई संदिग्ध सामान मिला है। इसके बाद वे लोगों को कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी या पुलिस जांच का डर दिखाते हैं। कई लोग घबराकर उनकी बातों में आ जाते हैं और पैसे भी दे देते हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि डिप्टी सीएम को किया गया फोन भी इसी तरह की ठगी का हिस्सा था या इसके पीछे कोई दूसरी मंशा थी। जांच एजेंसियां कॉल करने वाले की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारी खंगाल रही हैं।
लगातार बदल रहे हैं साइबर अपराधियों के तरीके
साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। पहले फर्जी वीडियो कॉल और एडिटेड वीडियो के जरिए लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था। कई मामलों में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर फोन करते हैं और कहते हैं कि आपके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। इसके बाद डर का माहौल बनाकर पैसे मांगते हैं। पुलिस का कहना है कि लोग ऐसे फोन कॉल से घबराएं नहीं और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी या पैसे न दें। डिप्टी सीएम को मिली धमकी के मामले को भी गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि यह राज्य के एक बड़े पद पर बैठे नेता से जुड़ा मामला है। उम्मीद की जा रही है कि नंबर ट्रेस होने के बाद पुलिस जल्द ही आरोपी तक पहुंच जाएगी और पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल की जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम सेल को दें, ताकि ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई की जा सके।
