दिल्ली में बढ़ती महंगाई और ईंधन की लगातार बढ़ रही कीमतों के खिलाफ अब कमर्शियल वाहन चालकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। राजधानी के ऑटो, टैक्सी, कैब और अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों की कई यूनियनों ने 21 मई से 23 मई तक तीन दिन की हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा किराए में वाहन चलाना अब घाटे का सौदा बन गया है और सरकार उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही है।

चालक संगठनों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि ऑटो और टैक्सी किराए में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। यूनियनों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के साथ-साथ वाहन मेंटेनेंस, इंश्योरेंस, फिटनेस, परमिट और रोजमर्रा के अन्य खर्च भी तेजी से बढ़े हैं। इससे ड्राइवरों की आमदनी लगातार घटती जा रही है और परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।

यूनियन नेताओं ने कहा है कि सरकार और परिवहन विभाग को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल का फैसला लिया गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और बड़ा किया जा सकता है।

इस हड़ताल में ऑटो रिक्शा, काली-पीली टैक्सी, ऐप आधारित कैब और छोटे कमर्शियल वाहन चालकों के शामिल होने की संभावना है। यूनियनों का दावा है कि बड़ी संख्या में वाहन सड़कों से गायब रह सकते हैं, जिससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों और आम यात्रियों पर पड़ने की आशंका है।

यूनियनों की मुख्य मांग है कि सरकार तुरंत ऑटो और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी करे ताकि बढ़ती लागत का बोझ कुछ कम हो सके। इसके अलावा सीएनजी पर सब्सिडी, पुराने चालानों में राहत और कमर्शियल वाहन चालकों के लिए विशेष आर्थिक सहायता की भी मांग की गई है। चालकों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से ही यह क्षेत्र आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

कई चालक संगठनों ने ऐप आधारित कैब कंपनियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कंपनियां ड्राइवरों से ज्यादा कमीशन वसूल रही हैं, जबकि यात्रियों से ऊंचा किराया लिया जा रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि इतनी मेहनत के बावजूद उनकी वास्तविक कमाई लगातार कम होती जा रही है।

दूसरी ओर परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है that यूनियनों की मांगों पर विचार किया जा रहा है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश होगी। सरकार नहीं चाहती कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी हो। सूत्रों के अनुसार जल्द ही यूनियन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बैठक हो सकती है।

हड़ताल की घोषणा के बाद आम यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। अगर बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी सड़कों पर नहीं उतरते हैं, तो मेट्रो और बसों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। सुबह और शाम के पीक ऑवर में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों में भी इसका असर दिखाई देने की संभावना है।

व्यापारिक संगठनों ने सरकार और यूनियनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से कारोबार और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। वहीं कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए सरकार से समय रहते हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फिलहाल सबकी नजर सरकार और यूनियनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि समझौता नहीं हुआ तो 21 मई से शुरू होने वाली यह तीन दिवसीय हड़ताल राजधानी की यातायात व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार किराया बढ़ाने और अन्य मांगों पर क्या फैसला लेती है।