गुवाहाटी की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी है।राज्य की सत्ता के गलियारों में सुबह से लेकर देर शाम तक नेताओं का आना-जाना लगातार जारी है।मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा के बंगले के बाहर गाड़ियों की लंबी कतार, मंत्रियों की लगातार बैठकें, और भाजपा–एनडीए खेमे की गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि असम अब एक बड़े राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है।मिशन 2.0 के नाम से शुरू इस नए अध्याय को न सिर्फ सत्ता का विस्तार माना जा रहा है, बल्कि आने वाले लोकसभा चुनावों में पूर्वोत्तर में NDA की पकड़ को और मज़बूत करने की रणनीति भी समझा जा रहा है।
गुवाहाटी की हलचल मंगलवार सुबह ही तेज हो गई थी। राज्य सचिवालय में असामान्य चहल-पहल थी कभी कोई विधायक पार्टी कार्यालय पहुँच रहा था, तो कभी मंत्री अचानक मुख्यमंत्री आवास के लिए निकल जाते।
मुलाक़ातों का दौर, रणनीति पर चर्चा
सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की बैठक BJP और AGP के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई।
बैठक का एजेंडा था।कैबिनेट विस्तार, किन चेहरों को शामिल किया जाए, और किन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दी जाए।
इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने जे पी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर लंबी चर्चा की। बताया जा रहा है कि मंत्री सूची को अंतिम रूप देने में दिल्ली की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
NDA का शक्ति प्रदर्शन
दोपहर होते-होते माहौल और गरमाया।
भाजपा ने अपने सभी विधायकों की अनिवार्य बैठक बुलाई।
इसके बाद NDA गठबंधन (BJP + AGP + UPPL) के कुल विधायकों ने एक संयुक्त बैठक की यह कदम साफ संकेत था कि हिमंता सरकार अपने मिशन 2.0 को मजबूत दिखाना चाहती है।फिर शुरू हुई राजनीतिक तस्वीर को सार्वजनिक करने की तैयारियाँ गुवाहाटी के राजभवन के बाहर बैरिकेडिंग बढ़ाई गई, मीडिया के कैमरे तैनात कर दिए गए, और नए चेहरों के शपथ ग्रहण की चर्चाएँ तेज हो गईं।
कौन-कौन शामिल हुए कैबिनेट में?
नई कैबिनेट सूची में इन चेहरों को जगह दी गई ।रंजन बोरठाकुर,जयनाथ शर्मा, नंदिता गारलोसा,भास्कर शर्मा,उत्पल बोरा इसके साथ ही कुछ पुराने मंत्रियों को नए विभाग दिए गए, ताकि सरकार चुनावी वर्ष में बेहतर तालमेल बना सके।
क्यों अहम है ‘मिशन 2.0’?
असम भाजपा का यह कदम केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा।पूर्वोत्तर में लगातार बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आने वाले चुनावों को देखते हुए यह विस्तार एक बड़े चुनावी कैलकुलेशन का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार युवा चेहरों को आगे लाकर ताज़गी का संदेश देना चाहती है।
क्षेत्रीय दलों को साथ रखकर NDA पूर्वोत्तर में अपना प्रभाव स्थिर करना चाहता है।विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए विभागों में नए संतुलन की जरूरत थी।
