पश्चिम एशिया में तनाव जिस तरह से बढ़ रहा है, उसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को गहरी चिंता में डाल दिया है। बीते कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक हालात इतने नाज़ुक हो चुके हैं कि छोटी-सी गलती भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है। इस बढ़ते तनाव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया भर में तेल, गैस और खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
तनाव की जड़ अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य हलचल मानी जा रही है। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में अपनी मौजूदगी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ा दी है, वही इलाका जहाँ से दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार होता है। दूसरी ओर, ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइल सिस्टम हाई अलर्ट पर रखे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देश सीधे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि किसी भी समय टकराव बढ़ सकता है।
इसी बीच कई देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। क़तर और ओमान के ज़रिए अमेरिका और ईरान के बीच बैक-डोर बातचीत जारी है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, जबकि यूरोपियन यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति और बिगड़ी, तो वैश्विक सप्लाई चेन टूट सकती है। बीते सप्ताह ब्रसेल्स में हुई एक बैठक में यूरोपीय नेताओं ने साफ कहा कि यह संकट पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन चुका है।
इस तनाव का पहला असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में दिखाई दिया है। कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं, और कई विश्लेषकों का कहना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा, तो कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। कई देशों ने एहतियात के तौर पर अपने स्ट्रैटेजिक ऑयल रिज़र्व सक्रिय करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। कुछ प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने मध्य-पूर्व के रास्तों को टालते हुए अपने रूट बदल दिए हैं, जिससे डिलिवरी महंगी और धीमी होने लगी है।
इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ने की आशंका है। भारत जैसे देशों में, जो तेल का बड़ा हिस्सा विदेश से खरीदते हैं, पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ सकते हैं। जब ईंधन महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट से लेकर बिजली और उद्योग तक हर चीज़ की लागत बढ़ जाती है। यही वजह है कि खाने-पीने का सामान, दालें, तेल, सब्जियाँ और अन्य जरूरी चीज़ें भी महंगी हो सकती हैं। सप्लाई चेन बाधित हुई तो गैस सिलेंडर से लेकर एयरलाइन टिकट तक सब पर असर पड़ेगा।
हालात पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया इस समय आर्थिक झटकों के असली डर से घिरी हुई है। बातचीत जारी है, लेकिन भरोसा कमज़ोर है। एक तरफ तनाव लगातार बढ़ रहा है, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय कूटनीतिक कोशिशों से हालात को काबू में रखने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन फिलहाल स्थिति साफ है अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी बड़ा सैन्य टकराव हुआ, तो उसका असर सिर्फ जंग के मैदान तक सीमित नहीं रहेगा। यह असर आम लोगों की जेब, बाज़ारों की स्थिरता और देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर महसूस किया जाएगा।
