2022 में साथ थे, अब आमने-सामने खड़े हैं अखिलेश और राजभर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर की जोड़ी पूर्वांचल में काफी असरदार साबित हुई थी। दोनों दलों के गठबंधन ने कई सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया और सुभासपा छह विधायक जिताने में सफल रही। लेकिन चुनाव खत्म होते ही राजनीतिक समीकरण बदल गए। ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिला लिया और योगी सरकार में मंत्री बन गए। यहीं से अखिलेश और राजभर के रिश्तों में दरार गहरी होती चली गई।
सीमा राजभर की नियुक्ति को माना जा रहा बड़ा संकेत
हाल ही में सपा ने अपनी महिला सभा की कमान बलिया की रहने वाली सीमा राजभर उर्फ भावना को सौंपी है। राजनीतिक गलियारों में इसे बड़ा संदेश माना जा रहा है। सीमा पहले ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से जुड़ी थीं और महिला मोर्चा में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। 2022 के बाद उन्होंने राजभर और उनके बेटे पर परिवारवाद और महिलाओं के शोषण के आरोप लगाए थे और सपा में शामिल हो गई थीं। अब उन्हें बड़ा पद देकर सपा ने साफ संकेत दिया है कि वह राजभर समाज में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
सुभासपा विधायकों पर भी सपा की नजर
सियासी चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि सपा सिर्फ राजभर वोट बैंक में सेंध नहीं लगाना चाहती, बल्कि सुभासपा के विधायकों को भी अपने साथ लाने की रणनीति बना रही है। 2022 में सुभासपा के छह विधायक जीते थे, जिनमें कई नेताओं का पुराना जुड़ाव सपा से रहा है। अब माना जा रहा है कि 2027 चुनाव से पहले इनमें से कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने भी इन अटकलों को और मजबूत किया है।
पूर्वांचल की राजनीति में राजभर वोट बेहद अहम
राजभर समाज की आबादी पूर्वांचल के कई जिलों में प्रभावशाली मानी जाती है। आंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, चंदौली और बस्ती जैसे इलाकों की कई सीटों पर इस समाज का असर है। ओम प्रकाश राजभर लंबे समय से इसी सामाजिक आधार के दम पर अपनी राजनीति मजबूत करते रहे हैं। अब सपा इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
सही समय पर बड़ा दांव चल सकती है सपा
सपा सांसद रामशंकर राजभर लगातार राजभर बहुल इलाकों में सक्रिय हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। वहीं सीमा राजभर भी खुलकर ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ बयान दे रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव अभी अपने सभी पत्ते नहीं खोल रहे हैं, लेकिन 2027 चुनाव से पहले वह ऐसा दांव चल सकते हैं जिससे ओम प्रकाश राजभर को बड़ा राजनीतिक झटका लगे।
