नवीदुल हसन

खेती के साथ अब पशुपालन बना कमाई का सहारा, महीने में 10 हजार तक अतिरिक्त आय

पटना: बिहार के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन अब लोगों की आमदनी का एक मजबूत जरिया बनता जा रहा है। सरकार की सतत जीविकोपार्जन योजना और मनरेगा के तहत किए गए प्रयासों से लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। खेती और मजदूरी के साथ-साथ अब ग्रामीण परिवार बकरी पालन, पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन से हर महीने अच्छी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।

ग्रामीण विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पशुपालन से जुड़ने वाले परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020-21 के बाद से अब तक करीब 8.12 लाख परिवार बकरी पालन से जुड़े हैं, जबकि 2.24 लाख परिवार पोल्ट्री फार्मिंग का काम कर रहे हैं। इसके अलावा 1.75 लाख परिवार डेयरी व्यवसाय और 751 परिवार मत्स्य पालन के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं। विभाग का कहना है कि इन परिवारों को पशुपालन से हर महीने औसतन 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

पशुपालन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं बकरी, मुर्गी और डेयरी कारोबार से जुड़ रही हैं। सरकार की ओर से इन्हें प्रशिक्षण के साथ-साथ कम ब्याज पर बैंक लोन की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई गांवों में महिला समूह संगठित होकर अपनी आय को दोगुना करने में सफल हुए हैं।

सरकार ने इस योजना में गरीब, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को प्राथमिकता दी है। इन वर्गों के लोगों को पशुपालन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मनरेगा के तहत पशुओं के लिए शेड का निर्माण कराया गया है, जिस पर राज्य सरकार ने हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। शेड बनने के बाद इन्हें समूहों के माध्यम से लाभार्थियों को सौंपा जाता है, ताकि वे स्थायी रूप से पशुपालन कर सकें।

योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक लोगों को ग्राम सभा या पूरक ग्राम सभा में आवेदन करना होता है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद लाभार्थी की पहचान के लिए एक यूनिक कोड जारी किया जाता है। इसके बाद पशुपालन से जुड़ा शेड तैयार किया जाता है और बैंक के माध्यम से लोन दिलाया जाता है, जिसे आसान किस्तों में चुकाया जा सकता है।

ग्रामीण विकास सह परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पशुपालन गांवों के विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि गरीबों और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में और निवेश करेगी, ताकि पशुपालन को ग्रामीण रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनाया जा सके।

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