पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदले राजनीतिक माहौल के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का कोलकाता पहुंचकर ममता बनर्जी से मुलाकात करना सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विपक्षी राजनीति के नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार और भाजपा की बड़ी जीत के बाद जिस तरह ममता बनर्जी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं, उसी बीच अखिलेश यादव का उनके घर पहुंचना विपक्षी एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। कोलकाता स्थित आवास पर हुई इस मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो ने पूरे दिन राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी।

“दीदी, आप लड़ी हैं… हारी नहीं” से दिया बड़ा संदेश
मुलाकात के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही जब अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को शॉल ओढ़ाते हुए कहा, “दीदी, आप लड़ी हैं… हारी नहीं हैं।” बताया गया कि अखिलेश ने यह बात तीन बार दोहराई। ममता बनर्जी ने मुस्कुराते हुए उन्हें अंदर आने के लिए कहा। यह सिर्फ एक भावनात्मक संवाद नहीं था, बल्कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों की साझा राजनीतिक लाइन का संकेत भी माना जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि कुछ रिश्ते राजनीति और समय से ऊपर होते हैं। इससे साफ संकेत मिला कि समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस आने वाले समय में एक-दूसरे के और करीब आ सकती हैं।
भाजपा ने साधा निशाना, “पंचर साइकिल” वाला तंज
जहां विपक्षी दल इस मुलाकात को लोकतंत्र और विपक्षी एकजुटता का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर तीखा हमला बोला। उत्तर प्रदेश भाजपा ने सामाजिक माध्यम पर तंज कसते हुए लिखा, “ना-उमीदी बढ़ गई है इस कदर, पंचर साइकिल लिए भटक रहे दर-ब-दर…”। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव में हार के बाद विपक्षी दल सहानुभूति की राजनीति कर रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के हमलों के बावजूद यह मुलाकात विपक्षी राजनीति में नई रणनीति की शुरुआत हो सकती है, खासकर तब जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष अभी से माहौल बनाने में जुटा है।
चार महीने में दूसरी मुलाकात, बढ़ती नजदीकियों के संकेत
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह चार महीने में दूसरी मुलाकात है। इससे पहले जनवरी में भी दोनों नेताओं की बैठक हुई थी। उस समय भी इसे भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़े विपक्षी समीकरण के रूप में देखा गया था।
दिलचस्प बात यह रही कि अखिलेश यादव पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर शामिल नहीं हुए, लेकिन सामाजिक माध्यमों के जरिए लगातार ममता बनर्जी के समर्थन में माहौल बनाते रहे। चुनाव नतीजों के अगले दिन ही वे कोलकाता जाना चाहते थे, लेकिन उस समय ममता बनर्जी ने उन्हें आने से मना कर दिया था। अब जब राजनीतिक माहौल थोड़ा शांत हुआ, तब यह मुलाकात हुई।
बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक संदेश
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस मुलाकात का असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इसके मायने निकाले जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों भाजपा विरोधी राजनीति की बड़ी आवाज बनने की कोशिश कर रही हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पर तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन द्वारा अखिलेश यादव का स्वागत और उसके बाद ममता बनर्जी के आवास पर गर्मजोशी भरी मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि विपक्षी दल आने वाले समय में साझा रणनीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह राजनीतिक नजदीकी सिर्फ बयान और मुलाकात तक सीमित रहती है या आने वाले चुनावों में इसका बड़ा असर भी दिखाई देता है।
