
मध्य प्रदेश के दिव्यांग क्रिकेटर लोकेंद्र आर्य के लिए संघर्ष और मेहनत आखिरकार रंग लाई है। सीमित संसाधनों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद क्रिकेट के प्रति जुनून बनाए रखने वाले लोकेंद्र का चयन अब इंडिया ए दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है। इस उपलब्धि के बाद उनके परिवार और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।
लोकेंद्र आर्य की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद क्रिकेट का सपना नहीं छोड़ा। बताया जाता है कि कई बार उन्हें जुगाड़ करके क्रिकेट किट खरीदनी पड़ी, लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। अब जब उनका चयन इंडिया ए टीम में हुआ है, तो उन्होंने कहा कि “नीली जर्सी पहनना हमेशा मेरा सपना था, अब वह सपना सच होने जा रहा है।”
संघर्षों के बीच नहीं छोड़ा सपना
लोकेंद्र ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने क्रिकेट में लगातार अभ्यास किया और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश जारी रखी। कई बार आर्थिक दिक्कतें सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकेंद्र बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बेहद जुनूनी रहे हैं। सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने अपने खेल को जारी रखा और लगातार मेहनत की। अब उनका इंडिया ए टीम में चयन पूरे इलाके के लिए गर्व की बात बन गया है।
नीली जर्सी पहनने का सपना होगा पूरा
इंडिया ए टीम में चयन के बाद लोकेंद्र ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश के लिए खेलना उनका सपना था। उन्होंने कहा कि अब उनकी कोशिश टीम में अच्छा प्रदर्शन कर आगे और बड़े स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की होगी।
स्थानीय लोग और खेल प्रेमी भी लोकेंद्र की इस सफलता को प्रेरणादायक बता रहे हैं। उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
फिलहाल, लोकेंद्र आर्य की यह सफलता न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए मिसाल बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
