नई दिल्ली। देश की राजनीति में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी ऐसा दावा किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। संजय राउत ने राहुल गांधी की कथित वियतनाम यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लौटने के बाद सत्ता परिवर्तन को लेकर घटनाक्रम देखने को मिलेगा। उन्होंने अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने का भी दावा किया और कहा कि इस बात को लिखकर रख लिया जाए। हालांकि, उनके इन दावों की पुष्टि करने वाली कोई आधिकारिक जानकारी खबर में सामने नहीं आई है।
राहुल गांधी के लौटते ही क्या होगा? संजय राउत के बयान से मची सियासी हलचल
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत के दौरान सत्ता परिवर्तन के सवाल पर कहा, “हो जाएगा रिजीम चेंज, आप देखते रहिए। राहुल गांधी वियतनाम गए हैं न, आने के बाद देखो।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा और विपक्ष की रणनीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। राउत ने अपने बयान में सत्ता परिवर्तन को लेकर विश्वास जताया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बदलाव किस प्रक्रिया, राजनीतिक घटनाक्रम या समयसीमा के तहत होगा। संजय राउत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की भूमिका, चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में ‘रिजीम चेंज’ शब्द का दोबारा इस्तेमाल होने से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अप्रैल के आखिरी सप्ताह में मोदी के जाने का दावा, राउत बोले- लिखकर रख लो
संजय राउत ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह में मोदी चले जाएंगे। राउत ने इस दावे को लेकर कहा, “आप लिखकर रख लो।” हालांकि, राउत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके कहने का आशय प्रधानमंत्री पद छोड़ने, सरकार बदलने या किसी अन्य राजनीतिक घटनाक्रम से है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण या विस्तृत राजनीतिक गणित भी सामने नहीं रखा। इसलिए उनके इस कथन को फिलहाल एक राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के पद छोड़ने या केंद्र सरकार में बदलाव को लेकर किसी आधिकारिक घोषणा का उल्लेख नहीं है। उनके बयान के बाद राजनीतिक चर्चा का केंद्र यह है कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन की बात को किस रणनीति के तहत उठा रहा है और आने वाले समय में इस पर किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
टाइगर श्रॉफ पर हमले का जिक्र कर मुंबई की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
संजय राउत ने बातचीत के दौरान अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले का जिक्र करते हुए मुंबई की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई में कानून-व्यवस्था की स्थिति हर दिन चरमराती जा रही है। राउत ने शस्त्र पूजा और दशहरे का उल्लेख करते हुए कहा, “हो सकता है कि आज की शस्त्र पूजा में धनुष-बाण न हो, लेकिन अगले दशहरे पर आपको यहां एक धनुष-बाण जरूर दिखेगा।” उनके इस बयान में इस्तेमाल किए गए धनुष-बाण के संदर्भ को लेकर राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने इसका विस्तृत आशय स्पष्ट नहीं किया। अभिनेता पर हमले का उल्लेख करते हुए राउत ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को राजनीतिक बहस से जोड़ा।
अल्बानिया के विरोध प्रदर्शनों पर संजय राउत की पोस्ट से भी मचा था विवाद
संजय राउत इससे पहले भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर विवादों में आ चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर अल्बानिया में हुए विरोध प्रदर्शनों का वीडियो साझा करते हुए वहां की घटनाओं की तुलना भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से की थी। राउत ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है। लोग इसलिए गुस्से में थे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया है। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को।” इस पोस्ट में राउत ने अल्बानिया में हुए विरोध प्रदर्शनों और सरकारी संस्थानों पर हमलों का उल्लेख करते हुए भारत को भी इससे सबक लेने की बात कही थी। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया था। अब ‘रिजीम चेंज’ को लेकर दिए गए उनके नए बयान के बाद एक बार फिर उनके राजनीतिक रुख और टिप्पणियों पर चर्चा हो रही है।
राहुल गांधी के वियतनाम जाने का भाजपा ने किया दावा, छुट्टियों को लेकर साधा निशाना
राहुल गांधी की कथित वियतनाम यात्रा को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी सवाल उठाए हैं। भाजपा ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि राहुल गांधी वियतनाम गए हैं। पार्टी की ओर से साझा किए गए वीडियो के साथ तंज कसते हुए लिखा गया, “झूठ फैलाते-फैलाते थक गया, कुछ दिन वियतनाम घूम आता हूं, किसी को क्या ही पता चलेगा!” भाजपा ने इस कथित विदेश यात्रा को लेकर राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल खड़े किए। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक बार फिर वही कर रहे हैं, जिसमें वह माहिर हैं- ब्रेक लेना और छुट्टियों का आनंद लेना। उन्होंने कहा कि खबर है कि राहुल गांधी छुट्टियों के लिए विदेश गए हैं और वह भारत में नहीं हैं। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपना अधिकतर समय विदेश यात्राओं में बिताते हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी भारत आते हैं, किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा करते हैं और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं। ये टिप्पणियां भाजपा नेताओं के आरोप हैं। राहुल गांधी की यात्रा को लेकर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया इस खबर में शामिल नहीं है। ऐसे में यात्रा से जुड़े दावों और राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
प्रशांत भूषण के ‘सत्ता परिवर्तन’ वाले बयान से शुरू हुआ था पूरा विवाद
‘रिजीम चेंज’ को लेकर ताजा राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में अधिवक्ता प्रशांत भूषण का बयान भी महत्वपूर्ण है। पिछले सप्ताह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने कहा था कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। उनके इस बयान पर भाजपा की ओर से सवाल उठाए गए थे और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। प्रशांत भूषण ने कहा था कि लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि मौजूदा संघर्ष अब वास्तव में सत्ता परिवर्तन के लिए है। प्रशांत भूषण के मुताबिक, सरकार का आरोप है कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है, जबकि विपक्ष अभी इस बात के लिए लड़ रहा है कि चुनाव ठीक ढंग से हों। उन्होंने आगे कहा था, “लेकिन अगर इसी तरह की बर्बरता जारी रही, तो सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से होगा।” उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा था, “हां, हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। इसमें क्या गलत है? भाजपा ने सत्ता परिवर्तन के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। अब वे कह रहे हैं कि सत्ता परिवर्तन के लिए कोई साजिश रची जा रही है।” प्रशांत भूषण के इस बयान के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे। अब संजय राउत की टिप्पणी ने इस विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है।
चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध से सत्ता परिवर्तन की बहस तक, आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ‘रिजीम चेंज’ का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा विपक्ष के बयानों को सत्ता परिवर्तन की मंशा से जोड़कर देख रही है। इस पूरे घटनाक्रम में संजय राउत के बयान, प्रशांत भूषण की टिप्पणी और राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा को लेकर भाजपा के आरोप अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं। इन बयानों के आधार पर किसी संभावित सत्ता परिवर्तन को निश्चित घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता।
निष्कर्ष: संजय राउत के दावों पर टिकी निगाहें, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
संजय राउत ने राहुल गांधी के वियतनाम से लौटने के बाद सत्ता परिवर्तन होने की बात कहकर राजनीतिक चर्चा को नया मोड़ दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अप्रैल के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी बड़ा दावा किया है। दूसरी ओर, भाजपा राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा पर सवाल उठा रही है, जबकि प्रशांत भूषण के बयान के बाद से सत्ता परिवर्तन की बहस पहले ही जारी है। फिलहाल, राउत के दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है। ऐसे में इन बयानों का राजनीतिक महत्व तो है, लेकिन आगे क्या होगा, यह आने वाले घटनाक्रम और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं से ही स्पष्ट हो सकेगा।
