बिजनेस डेस्क। वैश्विक निवेश परिदृश्य में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर दांव लगाने वाले विदेशी निवेशक अब अपनी रणनीति बदलते नजर आ रहे हैं। विदेशी फंड ताइवान और दक्षिण कोरिया के एआई एवं सेमीकंडक्टर शेयरों से निवेश कम कर भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के अपेक्षाकृत स्थिर क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इस बदलाव ने एशियाई शेयर बाजारों की दिशा और निवेशकों की प्राथमिकताओं को नया संकेत दिया है।
एआई सेक्टर से क्यों कम हो रहा है निवेश?
बढ़ते एआई निवेश के बावजूद उससे मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से कई बड़े विदेशी निवेशक अब अधिक संतुलित और अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल तेज वृद्धि की संभावना वाले क्षेत्रों की बजाय स्थिर और बेहतर मूल्यांकन वाले सेक्टर निवेशकों को अधिक आकर्षित कर रहे हैं।
दिग्गज विदेशी निवेशकों ने बदली रणनीति
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, Fidelity International, BNP Paribas और M&G Investments जैसे प्रमुख वैश्विक निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान की एआई तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू कर दिया है। इन संस्थानों का मानना है कि एआई क्षेत्र में हो रहे भारी निवेश के मुकाबले अपेक्षित प्रतिफल को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। ऐसे में बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों पर दिखा असर
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेश की निकासी के कारण दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है तो इन बाजारों में निवेशकों की गतिविधियों पर इसका असर आगे भी देखने को मिल सकता है।
भारत और चीन फिर बने विदेशी निवेशकों की पहली पसंद
दूसरी ओर, भारत और चीन एक बार फिर विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभरे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सहित कई प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन मिला है। वहीं चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे वहां के बाजार को मजबूती मिली है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में भी बढ़ा निवेश
भारत और चीन के अलावा इंडोनेशिया तथा थाईलैंड जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के शेयर बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है। विदेशी निवेशक इन बाजारों को अपेक्षाकृत बेहतर अवसर और संतुलित जोखिम वाला विकल्प मान रहे हैं, जिसके चलते इन देशों में भी पूंजी प्रवाह बढ़ रहा है।
क्या संकेत दे रहा है निवेशकों का यह रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां जोखिम अपेक्षाकृत कम हो और निवेश पर स्थिर प्रतिफल मिलने की संभावना अधिक हो। इसी कारण एआई और सेमीकंडक्टर शेयरों की तुलना में बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य मजबूत क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। यह रणनीतिक बदलाव आने वाले समय में एशियाई बाजारों के निवेश परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।
