नेपाल। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बाद हालात अभी सामान्य भी नहीं हुए हैं कि भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। रविवार को नदी के जलस्तर में दोबारा वृद्धि दर्ज किए जाने के बाद आसपास के इलाकों में नई बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और बचाव अभियान में जुटे कर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
तबाही के बीच फिर बढ़ा नदी का पानी, लोगों की चिंता बढ़ी
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा का असर बेहद व्यापक रहा है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 780 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 2,202 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार शव मिलने का सिलसिला जारी है। ऐसे समय में भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ना प्रशासन और बचाव एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को भोटेकोशी के बढ़ते जलस्तर को लेकर लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं।
20 हजार से अधिक बचावकर्मी खोज अभियान में जुटे
आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी नेपाल में बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान जारी रहा। 20 हजार से अधिक बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश करने और संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे रहे। भारी बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अभियान को जारी रखा गया है।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार अब तक 9,500 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक बाढ़ प्रभावित तीन जिलों के अलग-अलग स्कूलों के 238 छात्र और 18 शिक्षक अभी लापता हैं। इससे आपदा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चीन की ओर बनी झील ने बढ़ाई थी चिंता
भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पराडिगखड पशुतांगखेड़ा में भूस्खलन को संभावित कारण माना जा रहा है। भूस्खलन के बाद नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ और पानी बढ़ने से आसपास के घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा।
बाढ़ के बाद चीन की ओर एक झील बनने की खबर ने नई चिंता पैदा कर दी थी। आशंका थी कि यदि झील का पानी तेजी से आगे बढ़ता है तो नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि, चीनी मीडिया के अनुसार शनिवार को झील का आकार कम होने लगा था, जिससे तत्काल खतरे में कुछ कमी आने की बात कही गई।जलविद्युत परियोजनाओं में भी फंसे लोगों की आशंका
बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल की करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं में लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। इन परियोजनाओं तक पहुंचना राहत और बचाव दलों के लिए चुनौती बना हुआ है।
भारत की 11 सदस्यीय टीम भी बचाव अभियान में सहयोग कर रही है। त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में सुरक्षाबल भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की मदद से फंसे लोगों को निकालने के प्रयास में जुटे हैं। खराब मौसम और बारिश के बावजूद बचाव अभियान जारी रखा गया है।
नेपाल की बाढ़ का असर बिहार तक, गंडक और कोसी में उफान
नेपाल में लगातार भारी बारिश का असर भारत के बिहार में भी दिखाई देने लगा है। पिछले तीन दिनों से नेपाल में हो रही बारिश के कारण गंडक और कोसी नदियों के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से वृद्धि हुई है।
पटना से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 24 घंटे में दोनों नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आशंका जताई गई है कि सोमवार दोपहर तक इन नदियों का बढ़ा हुआ पानी पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज जिलों से होकर गुजर सकता है। इससे इन इलाकों में भी प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
149 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला गया
नेपाल में आई बाढ़ के बाद 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इन लोगों की सूची जारी की। भारत सरकार नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम से भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की है। यह टीम आपदा में मारे गए लोगों के डीएनए नमूनों की जांच करेगी। इस प्रक्रिया के जरिए मृतकों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।
मौतों और लापता लोगों की संख्या ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में इस आपदा के बाद सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना है। 780 लोगों की मौत और 2,202 लोगों के अब भी लापता होने का आंकड़ा आपदा की भयावहता को दर्शाता है। कई इलाकों में बाढ़, मलबे और क्षतिग्रस्त सड़क-पुलों के कारण बचाव दलों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बचाव अभियान में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इसके बावजूद लगातार बदलता मौसम और भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
फिर क्यों महत्वपूर्ण हो गया भोटेकोशी नदी का जलस्तर?
भोटेकोशी नदी पहले ही विनाशकारी बाढ़ का केंद्र बन चुकी है। ऐसे में नदी के जलस्तर में दोबारा वृद्धि होने से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि आपदा प्रबंधन एजेंसियां नदी के जलस्तर और आसपास की परिस्थितियों पर विशेष नजर रख रही हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। राहत और बचाव दलों को भी संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
नेपाल के बाद बिहार पर भी नजर
नेपाल और बिहार के बीच नदियों का सीधा संबंध होने के कारण नेपाल में होने वाली भारी बारिश का प्रभाव बिहार के कई नदी क्षेत्रों पर पड़ता है। वर्तमान स्थिति में गंडक और कोसी के बढ़ते जलस्तर ने बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज जैसे जिलों की चिंता बढ़ाई है।
नेपाल में भोटेकोशी का बढ़ता जलस्तर और बिहार में गंडक-कोसी का उफान फिलहाल प्रशासन के लिए निगरानी का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
