समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी की तस्वीर। | Source: Social media

समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी की तस्वीर।Source : Social media

लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार की एक युवा महिला नेता ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजनीति में नया चेहरा होने के बावजूद उन्होंने न सिर्फ चुनावी मैदान में जीत दर्ज की, बल्कि सबसे कम उम्र की सांसद बनने का गौरव भी हासिल किया। आखिर कौन हैं शांभवी चौधरी, जिनकी चर्चा आज देशभर में हो रही है?समस्तीपुर लोकसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली शांभवी चौधरी भारत की सबसे कम उम्र की सांसद हैं। वह बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की बेटी हैं और एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आती हैं, जिसकी तीन पीढ़ियां सार्वजनिक जीवन से जुड़ी रही हैं। हालांकि, उनकी पहचान सिर्फ राजनीतिक विरासत तक सीमित नहीं है। शिक्षा, सामाजिक सोच, अंतरजातीय विवाह और राजनीति में उनकी एंट्री इन सभी कारणों से वह लगातार चर्चा में रही हैं।

कौन हैं शांभवी चौधरी?

शांभवी चौधरी बिहार की युवा राजनेता हैं। वह बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू नेता अशोक चौधरी की बेटी हैं। पहली बार राजनीति में आने के साथ ही उन्हें चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने समस्तीपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। बाद में उन्होंने चुनाव जीतकर संसद तक का सफर तय किया।

राजनीतिक परिवार से है संबंध

शांभवी का परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता अशोक चौधरी बिहार के वरिष्ठ दलित नेताओं में गिने जाते हैं और कई बार मंत्री रह चुके हैं। जेडीयू में आने से पहले वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।उनके दादा महावीर चौधरी भी कांग्रेस के बड़े नेता थे। वे नौ बार विधायक चुने गए और बिहार सरकार में कई बार मंत्री रहे। ऐसे में राजनीति का माहौल शांभवी ने बचपन से ही देखा।

कैसे मिला राजनीति में पहला मौका?

शांभवी पहले किसी राजनीतिक दल की सदस्य नहीं थीं। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने और उनके पति ने अपनी राजनीतिक इच्छा चिराग पासवान के सामने रखी। पार्टी स्तर पर कई दौर की चर्चा और सर्वे के बाद उन्हें समस्तीपुर से उम्मीदवार बनाया गया।शांभवी का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें राजनीति में इतनी जल्दी इतना बड़ा मौका मिल जाएगा।

टिकट मिलने पर भावुक हो गई थीं

जब उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी मिली तो वह काफी भावुक हो गईं। खुशी के आंसुओं के साथ उन्होंने अपने पिता अशोक चौधरी को गले लगाया। उस समय अशोक चौधरी ने उनसे कहा कि यह वही सपना है, जिसे वह लंबे समय से पूरा करना चाहती थीं।

शिक्षा और प्रोफेशन

शांभवी ने पटना के नोट्रे डेम एकेडमी से शुरुआती पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। वह पटना के ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल की निदेशक के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

किशोर कुणाल के परिवार से है रिश्ता

शांभवी की शादी बिहार के चर्चित पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल के बेटे सायण कुणाल से हुई है। सायण शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं और ज्ञान निकेतन स्कूल का संचालन देखते हैं।किशोर कुणाल अपने पुलिस सेवा के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। वे लंबे समय तक पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं।

अंतरजातीय विवाह को लेकर क्या कहती हैं?

शांभवी ने जाति से बाहर शादी की है। उनका कहना है कि उनके परिवार में शिक्षा और सोच को हमेशा जाति से ऊपर रखा गया। उन्होंने कहा कि शादी इंसान को देखकर की जाती है, जाति देखकर नहीं।उनका मानना है कि किसी नेता की क्षमता उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके काम से तय होनी चाहिए।

राजनीति में किनसे मिलती है प्रेरणा?

शांभवी अपने पिता अशोक चौधरी को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत मानती हैं। इसके अलावा वह चिराग पासवान की राजनीति और उनके बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट विजन से भी प्रभावित होने की बात कह चुकी हैं।

समस्तीपुर में क्या रही चुनौती?

समस्तीपुर सीट पर चुनाव लड़ते समय शांभवी के सामने कई चुनौतियां थीं। विपक्ष ने उन्हें बाहरी उम्मीदवार बताया। इसके अलावा स्थानीय सामाजिक और जातीय समीकरण भी उनके लिए बड़ी परीक्षा माने गए। खासकर यादव, मुस्लिम और स्थानीय वोटरों का समर्थन हासिल करना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा था।

क्यों रहती हैं चर्चा में?

कम उम्र में राजनीति में एंट्री, बड़े राजनीतिक परिवार से संबंध, अंतरजातीय विवाह, उच्च शिक्षा और पहली बार में लोकसभा तक पहुंचने का सफर शांभवी चौधरी को बिहार की चर्चित युवा नेताओं में शामिल करता है। उनकी राजनीतिक यात्रा को आने वाले वर्षों में भी करीब से देखा जाएगा।