
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता।Source : Chrome
NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। दिल्ली में विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बाद अब राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया।
जयपुर में कांग्रेस का धरना, कई नेता हिरासत में
राजधानी जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए धरना दिया। प्रदर्शन करीब सवा घंटे तक चला, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अशोक गहलोत सहित सौ से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। बाद में सभी को पुलिस वाहनों के जरिए मौके से हटाया गया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारे लगाए और उनका पुतला भी फूंका। नेताओं का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए।
अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
हिरासत में लिए जाने से पहले मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार ने इस पूरे विवाद को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे छात्रों और युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ता गया।
सरकार ने छात्रों की बात तक नहीं सुनी'
गहलोत ने कहा कि छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने तक नहीं पहुंचा। उनके अनुसार, संवाद की कमी के कारण ही विपक्ष को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना पड़ा।
दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई की आलोचना
पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि किसी भी लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए, न कि उसे दबाने की कोशिश की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
अशोक गहलोत ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार को पारदर्शी कदम उठाने होंगे।
