नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को देर शाम पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए नेताओं को पहले छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया था, जहां से रिहाई के बाद सभी नेता बाहर निकले। रिहाई के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला तथा छात्रों की मांगों को लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग दोहराई।
सोनिया गांधी भी पहुंचीं पुलिस स्टेशन
इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने के बाद पुलिस उन्हें अलग-अलग स्थानों पर लेकर गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के बाहर और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी।
प्रियंका गांधी ने छात्रों के मुद्दे को बताया सबसे बड़ा सवाल
रिहाई के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश के युवा और छात्र भारत का भविष्य हैं तथा उनकी आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्र एक वास्तविक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और विपक्ष का दायित्व है कि वह उनके साथ मजबूती से खड़ा रहे।
प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह गलत था। उन्होंने कहा कि जहां भी जरूरत पड़ेगी, वहां विपक्ष उनकी आवाज बुलंद करेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है और इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि इस पूरे मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए तथा छात्रों की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
अखिलेश यादव बोले- सरकार छात्रों की मांगें स्वीकार करे
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार से छात्रों की मांगों को स्वीकार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है और सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्ष संसद के भीतर भी छात्रों के मुद्दे को मजबूती से उठाएगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को नजरअंदाज करना उचित नहीं है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुननी चाहिए।
केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार अलोकतांत्रिक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले भी नियमों के अनुसार नोटिस दिया था और इस बार भी चर्चा की मांग की गई, लेकिन सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस प्रकार की कार्रवाई की गई, उससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उनका कहना था कि विपक्ष संसद के भीतर चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इस विषय पर खुली बहस से बच रही है।
दीपेंद्र हुड्डा ने दोहराई इस्तीफे की मांग
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती।
दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग सिविल कपड़ों में लाठीचार्ज करते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाया नहीं जा सकता और विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार युवाओं के हितों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सचिन पायलट ने हिरासत को बताया लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि विपक्ष के नेता को जिस तरह सड़क से हिरासत में लिया गया, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता युवाओं के मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे।
सचिन पायलट ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष युवाओं के हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखेगा।
लोक कल्याण मार्ग से संसद तक गरमाई राजनीति
लोक कल्याण मार्ग पर हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद विपक्षी नेताओं की हिरासत तथा रिहाई ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है। विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की मांगों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को प्रमुख मुद्दा बना रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर भी इस विषय पर टकराव की संभावना बढ़ गई है।
